
हाय दोस्तों! क्या आपने कभी सोचा है कि रिटायरमेंट के बाद आपकी नियमित आय का स्रोत क्या होगा? अगर आप 60 साल के होने वाले हैं या पहले ही रिटायर हो चुके हैं, तो यह पोस्ट सीधे आपके लिए है। आज हम सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 2025 के नए अपडेट्स पर डिटेल में चर्चा करेंगे। यह जानेंगे कि कैसे यह योजना आपकी रिटायरमेंट के बाद इनकम को सुरक्षित और नियमित बना सकती है। पूरी जानकारी सरल हिंदी में समझिए, ताकि आप बिना किसी कन्फ्यूजन के सही फैसला ले सकें।
भारत में सीनियर सिटीजन योजना की 2025 में प्रासंगिकता
बुजुर्गों की बढ़ती आबादी और आर्थिक जरूरतें
भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2031 तक वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 19.4 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है (स्रोत: मंत्रालय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन)। इस बदलती जनसांख्यिकी के साथ, रिटायरमेंट के बाद इनकम का सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है। पारंपरिक पारिवारिक सहायता प्रणाली कमजोर होने से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत बढ़ गई है। सीनियर सिटीजन स्कीम इसी जरूरत को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
मौजूदा आर्थिक चुनौतियाँ
मुद्रास्फीति की उच्च दर और चिकित्सा व्यय में निरंतर वृद्धि ने बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। 2025 में औसत चिकित्सा मुद्रास्फीति दर 10-12% रहने का अनुमान है (स्रोत: इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन)। ऐसे में, बुजुर्गों के लिए बचत योजना का चुनाव करते समय रिटर्न की दर और सुरक्षा दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। सरकार ने इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखकर सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 2025 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
2025 में योजना के प्रमुख अपडेट
इस वर्ष सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में दो बड़े बदलाव किए गए हैं। पहला, निवेश की अधिकतम सीमा को 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दिया गया है। दूसरा, खाता खोलने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है जिससे देश के किसी भी कोने से ऑनलाइन आवेदन संभव है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य बुजुर्गों की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करना और योजना तक पहुँच आसान बनाना है (स्रोत: वित्त मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट)।
भविष्य के लिए निहितार्थ
2025 सेविंग स्कीम में किए गए ये बदलाव दर्शाते हैं कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा को गंभीरता से ले रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस योजना को और अधिक लचीला बनाया जा सकता है, जिसमें आंशिक निकासी की सुविधा या मुद्रास्फीति-अनुकूलित ब्याज दरें शामिल हो सकती हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बुजुर्गों के लिए डिज़ाइन की गई योजनाओं की मांग अगले पांच वर्षों में 25% बढ़ने की उम्मीद है (स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक)।
बुजुर्गों के लिए बचत योजना की विस्तृत समीक्षा
योजना की मुख्य विशेषताएँ
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम भारत सरकार द्वारा समर्थित एक सुरक्षित निवेश विकल्प है जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए डिज़ाइन की गई है। इसकी खास बात यह है कि इसमें निवेश पर मिलने वाला ब्याज त्रैमासिक रूप से देय होता है, जो बुजुर्गों की आय का नियमित स्रोत बन जाता है। खाता खोलने के लिए न्यूनतम निवेश 1000 रुपये है और अधिकतम सीमा 45 लाख रुपये (2025 अपडेट के अनुसार) निर्धारित की गई है। यह योजना डाकघरों और अधिकृत बैंकों के माध्यम से उपलब्ध है।
2025 में ब्याज दरों में बदलाव
वर्तमान में, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 2025 पर ब्याज दर 8.2% प्रति वर्ष है, जो त्रैमासिक रूप से देय होती है। यह दर सरकार द्वारा तिमाही आधार पर समीक्षा की जाती है। जनवरी-मार्च 2025 तिमाही के लिए यह दर 0.1% बढ़ाई गई थी (स्रोत: भारत बजट दस्तावेज)। बुजुर्गों के लिए बचत योजना में यह ब्याज दर अधिकांश अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों की तुलना में बेहतर है। उदाहरण के लिए, सावधि जमा पर औसत ब्याज दर वर्तमान में 6.5-7.5% के बीच है।

निवेश सीमा और टैक्स लाभ
2025 में, इस योजना में अधिकतम निवेश सीमा को 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि एक वरिष्ठ नागरिक अब तक 45 लाख रुपये तक निवेश कर सकता है और 8.2% की वार्षिक ब्याज दर पर आय अर्जित कर सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत, आप इस योजना में निवेश की गई राशि पर 1.5 लाख रुपये तक की कर कटौती का दावा कर सकते हैं। हालाँकि, ब्याज आय पूरी तरह से कर योग्य है और इसे ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ के तहत घोषित किया जाना चाहिए।
अन्य योजनाओं के साथ तुलना
जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम कई मायनों में अन्य विकल्पों से बेहतर है। पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) की वर्तमान ब्याज दर 7.1% है, जो SCSS से कम है। इसी तरह, बैंक FD पर ब्याज दरें भी कम हैं। हालाँकि, पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) कुछ लोगों के लिए आकर्षक हो सकती है, लेकिन इसकी अधिकतम जमा सीमा केवल 9 लाख रुपये है। एससीएसएस की विशिष्टता यह है कि यह उच्च ब्याज दर, सरकारी गारंटी और नियमित आय का आदर्श संयोजन प्रदान करती है।
2025 सेविंग स्कीम में नए नियम और पात्रता
आयु सीमा और पात्रता मानदंड
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में खाता खोलने के लिए मुख्य पात्रता मानदंड आयु है। सामान्य नियम के अनुसार, आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। हालाँकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी आवेदन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जो लोग वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) के माध्यम से रिटायर हुए हैं, वे 55 वर्ष की आयु में ही योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए उन्हें सेवानिवृत्ति के आदेश की प्रति जमा करनी होगी। रिटायरमेंट के बाद इनकम के इस स्रोत का लाभ उठाने के लिए भारत का निवासी होना भी अनिवार्य है।
आवेदन प्रक्रिया में डिजिटल सुधार
2025 में, सीनियर सिटीजन स्कीम के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटाइज़ कर दिया गया है। अब आप डाकघर की वेबसाइट या अधिकृत बैंकों के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में आधार कार्ड, पैन कार्ड, आयु प्रमाण और पते के प्रमाण जैसे दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करना शामिल है। डिजिटली सत्यापित होने के बाद, आपको सिर्फ एक बार संबंधित डाकघर या बैंक शाखा में जाकर फॉर्म पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है। इस डिजिटल सुविधा ने पूरे भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए योजना तक पहुँच आसान बना दी है।

प्रीमेच्योर विदड्रॉल के नए प्रावधान
2025 अपडेट के साथ, योजना से पहले निकासी के नियमों में भी ढील दी गई है। अब आप खाता खोलने के एक वर्ष बाद ही पैसे निकाल सकते हैं, जबकि पहले यह अवधि दो वर्ष थी। हालाँकि, समय से पहले निकासी के लिए जुर्माना अभी भी लागू होता है। यदि आप खाता खोलने के एक वर्ष बाद लेकिन पाँच वर्ष पूरे होने से पहले पैसे निकालते हैं, तो आपसे जमा राशि पर 1.5% का जुर्माना काटा जाएगा। पाँच वर्ष पूरे होने के बाद, आप बिना किसी जुर्माने के पैसे निकाल सकते हैं। वित्त विभाग के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय आपात स्थितियों में अधिक लचीलापन प्रदान करना है (स्रोत: डाक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट)।
खाता विस्तार और नामांकन प्रक्रिया
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम की अवधि प्रारंभ में पाँच वर्ष है, लेकिन इसे परिपक्वता के बाद अतिरिक्त तीन वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस विस्तार के लिए आपको परिपक्वता तिथि से एक महीने पहले आवेदन करना होगा। 2025 में नामांकन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। आप खाता खोलते समय ही एक या अधिक नामांकित व्यक्तियों को नामित कर सकते हैं। खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में, नामांकित व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों के साथ शेष राशि प्राप्त कर सकता है। इस सुविधा ने उत्तराधिकार संबंधी मामलों में काफी सरलता ला दी है।
रिटायरमेंट प्लानिंग में SCSS का स्थान
अन्य निवेश विकल्पों के साथ तुलना
जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो विभिन्न निवेश विकल्पों के बीच तुलना करना महत्वपूर्ण है। म्यूचुअल फंड, विशेष रूप से डेट फंड, उच्च रिटर्न की पेशकश कर सकते हैं लेकिन उनमें जोखिम भी होता है। इसके विपरीत, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम पूंजी की सुरक्षा और स्थिर आय पर ध्यान केंद्रित करती है। 2025 में, SCSS की ब्याज दर 8.2% है, जबकि सावधि जमा पर औसतन 6.5-7.5% ब्याज मिलता है। पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (POMIS) 7.4% ब्याज प्रदान करती है, लेकिन अधिकतम निवेश सीमा केवल 4.5 लाख रुपये है। SCSS का मुख्य लाभ यह है कि यह उच्च ब्याज दर, सरकारी गारंटी और उदार निवेश सीमा का संयोजन प्रदान करती है।
मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षा
मुद्रास्फीति रिटायरमेंट के बाद की आय के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा है। भारत में औसत मुद्रास्फीति दर 5-6% रहने का अनुमान है (स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक)। 4% से कम ब्याज देने वाली योजनाएँ वास्तव में आपकी क्रय शक्ति को कम कर सकती हैं। 8.2% की वर्तमान ब्याज दर के साथ, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 2025 मुद्रास्फीति को मात देने और वास्तविक रिटर्न प्रदान करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए, यदि आप 30 लाख रुपये का निवेश करते हैं, तो आपको प्रति तिमाही लगभग 61,500 रुपये ब्याज मिलेगा, जो कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए मासिक खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
आय स्ट्रीम बनाने के व्यावहारिक टिप्स
रिटायरमेंट के बाद इनकम का प्रबंधन करते समय, विविधीकरण महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आपकी सेवानिवृत्ति बचत का 40-50% SCSS जैसी सुरक्षित योजनाओं में निवेश किया जाना चाहिए। शेष को वृद्धि के अवसरों के लिए इक्विटी या म्यूचुअल फंड में आवंटित किया जा सकता है। एक प्रभावी रणनीति यह है कि आप अपनी बचत को विभिन्न परिपक्वता अवधियों वाले एकाधिक SCSS खातों में विभाजित कर दें। इस तरह, हर कुछ वर्षों में जब एक खाता परिपक्व होगा, तो आप उस राशि को फिर से निवेश कर सकते हैं या चिकित्सा आपात स्थिति जैसी आवश्यकताओं के लिए उपयोग कर सकते हैं। एक संतुलित दृष्टिकोण आपको वित्तीय सुरक्षा और वृद्धि दोनों प्रदान कर सकता है।
दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए रणनीतियाँ
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा योजना के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि आपकी आयु 70 वर्ष से कम है, तो आप SCSS के साथ-साथ प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) पर भी विचार कर सकते हैं, जो 8% तक की गारंटीड पेंशन प्रदान करती है। 75 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए, पेंशन योजना और SCSS का संयोजन एक स्थिर आय सुनिश्चित कर सकता है। याद रखें कि SCSS खाते की अधिकतम अवधि 8 वर्ष है, इसलिए परिपक्वता के बाद फंड को फिर से निवेश करने की योजना बनाना महत्वपूर्ण है। वित्तीय सलाहकार अक्सर अनुशंसा करते हैं कि आप परिपक्वता राशि का एक हिस्सा नई SCSS में और शेष को अल्पकालिक साधनों में निवेश करें ताकि तरलता बनी रहे।
वरिष्ठ नागरिक योजना के टैक्स फायदे
धारा 80सी के तहत कर लाभ
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में निवेश करने का एक प्रमुख लाभ आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर कटौती है। आप वित्तीय वर्ष में योजना में जमा की गई राशि पर 1.5 लाख रुपये तक की कर कटौती का दावा कर सकते हैं। यह लाभ केवल नई जमा पर लागू होता है, न कि मौजूदा खातों में नवीनीकरण पर। उदाहरण के लिए, यदि आप 2025-26 के दौरान SCSS में 2 लाख रुपये जमा करते हैं, तो आप अपनी कुल आय में से 1.5 लाख रुपये की कटौती कर सकते हैं, जिससे आपकी कर दायित्व काफी कम हो जाएगी। कर बचत के लिहाज से यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे कुशल विकल्पों में से एक है।
ब्याज आय पर टैक्स प्रभाव
हालांकि SCSS में निवेश पर धारा 80सी के तहत कर लाभ मिलता है, लेकिन इस पर अर्जित ब्याज पूरी तरह से कर योग्य है। ब्याज आय को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ के तहत घोषित किया जाना चाहिए और यह आपकी कुल आय में जुड़ जाती है। यदि ब्याज आय प्रति वर्ष 50,000 रुपये से अधिक है, तो बैंक या डाकघर TDS (स्रोत पर कर कटौती) 10% की दर से काटेगा। हालाँकि, यदि आपकी कुल आय कर-मुक्त सीमा से कम है, तो आप फॉर्म 15G/15H जमा करके TDS से छूट प्राप्त कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर छूट सीमा 3 लाख रुपये प्रति वर्ष है, जो उन्हें ब्याज आय पर कर का बोझ कम करने में मदद करती है (स्रोत: आयकर विभाग)।
टैक्स प्लानिंग की उन्नत रणनीतियाँ
बुजुर्गों की आय पर कर प्रभाव को कम करने के लिए कुछ चतुर रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं। एक प्रभावी तरीका यह है कि आप अपनी निवेश राशि को अपने और अपने जीवनसाथी के बीच विभाजित कर दें। चूंकि प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक 45 लाख रुपये तक निवेश कर सकता है, इसलिए दो खाते खोलकर आप निवेश पर कर लाभ दोगुना कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ब्याज आय को दो व्यक्तियों के बीच विभाजित करने से प्रत्येक व्यक्ति की आय कम हो सकती है, जिससे समग्र कर दायित्व कम हो सकता है। एक और रणनीति यह है कि आप अपने ब्याज आय का एक हिस्सा चिकित्सा बीमा या स्वास्थ्य बचत योजनाओं में निवेश करें, जो धारा 80डी के तहत अतिरिक्त कर कटौती प्रदान कर सकती हैं।
विभिन्न आय स्रोतों के साथ समन्वय
अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों के पास पेंशन, बैंक जमा पर ब्याज या किराये की आय जैसे कई आय स्रोत होते हैं। रिटायरमेंट के बाद इनकम के कर प्रभाव का प्रबंधन करते समय, सभी स्रोतों पर विचार करना महत्वपूर्ण है। SCSS से ब्याज आय को अन्य स्रोतों से आय के साथ जोड़ा जाना चाहिए। यदि आपकी कुल आय कर सीमा से कम है, तो SCSS से ब्याज आय पर कोई कर नहीं लगेगा। 2025-26 के लिए, 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए कर मुक्त सीमा 3 लाख रुपये है। यदि आपकी कुल आय इस सीमा से अधिक है, तो आप SCSS ब्याज आय के लिए TDS से बचने के लिए फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं, बशर्ते कि आपकी कुल आय कर योग्य सीमा से कम हो। उचित कर योजना से आप अपनी सेवानिवृत्ति आय का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।
पेंशन योजना के रूप में SCSS का उपयोग
मासिक आय गणना और वास्तविक उदाहरण
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम को प्रभावी ढंग से एक पेंशन योजना के रूप में उपयोग किया जा सकता है। ब्याज त्रैमासिक रूप से देय होता है, लेकिन आप इसे अपनी मासिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रबंधित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप 30 लाख रुपये का निवेश करते हैं, तो वार्षिक ब्याज 8.2% की दर से 2,46,000 रुपये होगा। यह प्रति तिमाही लगभग 61,500 रुपये या प्रति माह लगभग 20,500 रुपये के बराबर है। 2025 में अधिकतम सीमा 45 लाख रुपये होने से, आप प्रति माह 30,750 रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं। यह नियमित आय कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए मूलभूत जीवन यापन खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो सकती है।
नामांकन और उत्तराधिकार प्रबंधन
SCSS खाता खोलते समय नामांकन का प्रावधान एक महत्वपूर्ण विशेषता है। आप एक या एकाधिक नामांकित व्यक्तियों को नामित कर सकते हैं और प्रत्येक को हिस्सेदारी का प्रतिशत निर्दिष्ट कर सकते हैं। खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में, नामांकित व्यक्ति मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान प्रमाण और खाता विवरण जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके शेष राशि प्राप्त कर सकता है। 2025 में, इस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है – अब नामांकित व्यक्तियों को केवल एक आवेदन पत्र और स्व-सत्यापित दस्तावेजों की प्रतियां जमा करने की आवश्यकता होती है। वरिष्ठ नागरिक योजना की यह विशेषता यह सुनिश्चित करती है कि आपके निधन के बाद आपके प्रियजनों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
खाता प्रबंधन के लिए आसान तरीके
2025 में, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम के खाता प्रबंधन को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है। अब आप डाकघर या बैंक की शाखा में जाए बिना ऑनलाइन खाता विवरण देख सकते हैं। अधिकांश संस्थान मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से ब्याज विवरण और खाता शेष तक पहुँच प्रदान करते हैं। ब्याज भुगतान के लिए, आप सीधे अपने बचत खाते में ट्रांसफर का विकल्प चुन सकते हैं, जिससे नकद निकासी की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। खाता नवीनीकरण के लिए, आपको परिपक्वता से 30 दिन पहले एक साधारण फॉर्म जमा करना होगा। ये डिजिटल सुविधाएँ वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय प्रबंधन को काफी सरल बनाती हैं।
आपात स्थिति के लिए वित्तीय योजना
हालाँकि सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम मुख्य रूप से नियमित आय के लिए डिज़ाइन की गई है, लेकिन 2025 के नियम आपातकालीन स्थितियों में अधिक लचीलापन प्रदान करते हैं। जैसा कि पहले बताया गया है, आप अब खाता खोलने के एक वर्ष बाद ही पैसे निकाल सकते हैं। चिकित्सा आपात स्थिति के मामले में, आप समय से पहले निकासी के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए आपको चिकित्सा बिलों का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। कुछ संस्थान विशेष परिस्थितियों में जुर्माना माफ करने की पेशकश भी करते हैं। हालाँकि, अनुशंसा यह है कि आप SCSS को अपनी प्राथमिक आय योजना के रूप में बनाए रखें और आपात स्थितियों के लिए एक अलग आपातकालीन निधि रखें।
FAQs: बुजुर्गों की आय Qs
रिटायरमेंट के बाद इनकम की योजना बनाना एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय है। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 2025 अपनी सुरक्षा, उच्च ब्याज दर और सरकारी गारंटी के कारण वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है। 2025 में निवेश सीमा में वृद्धि और डिजिटल प्रक्रियाओं ने इसे और भी आकर्षक बना दिया है। याद रखें कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और आवश्यकताओं पर विचार करें।
अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अन्य वरिष्ठ नागरिकों और रिटायरमेंट की योजना बना रहे लोगों के साथ साझा करें। आपके विचार और सवाल नीचे कमेंट सेक्शन में सादर आमंत्रित हैं। आपकी वित्तीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है!

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes
Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in
the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and
India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial
decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.





