कर बचत का एक-पेज प्लान: किसे चुनें — Old Regime या New Regime? (2024-25 में पूरी गाइड)

Updated on: December 7, 2025 9:55 AM
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कर बचत का एक-पेज प्लान: किसे चुनें — Old Regime या New Regime? (2024-25 में पूरी गाइड)

हाय दोस्तों! क्या आप भी हर साल मार्च आते ही इसी सवाल में उलझ जाते हैं कि आखिर पुराना टैक्स रेजिम चुनें या नया टैक्स रेजिम? इतने सारे सेक्शन, डिडक्शन और स्लैब देखकर कन्फ्यूजन होना बिल्कुल स्वाभाविक है। पर चिंता की कोई बात नहीं, आज हम इस भूलभुलैया से आपको बाहर निकालेंगे। यह लेख आपके लिए एक सरल, सीधा और एक्शन से भरपूर गाइड है। हमारा वादा है: यहाँ से जाने से पहले आपके पास अपने लिए सही कर बचत योजना का एक स्पष्ट प्लान होगा।

अपनी टैक्स प्लानिंग को आसान बनाने के लिए, हमने Old Regime vs New Regime के बीच के पूरे मैच का सिर-से-सिर विश्लेषण तैयार किया है। एक बात और, नई व्यवस्था के तहत अब 12.75 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह से कर-मुक्त हो सकती है, जो एक बड़ा राहत भरा बदलाव है।

पहला कदम: Old और New Regime को सरल शब्दों में समझें

चलिए, बिना किसी जटिल शब्दजाल के इन दोनों रास्तों को समझते हैं। याद रखिए, यहाँ कोई गलत जवाब नहीं है, बस आपकी वित्तीय आदतों के हिसाब से एक बेहतर विकल्प है।

Old Regime (पुरानी व्यवस्था): इसे “छूट और कटौतियों वाला रास्ता” कह सकते हैं। इसका मूल मंत्र है – जितनी अधिक बचत और निवेश करोगे, उतना ही टैक्स कम देना पड़ेगा। इसमें आप सेक्शन 80C (PPF, ELSS, बीमा आदि), 80D (मेडिकल इंश्योरेंस), HRA (हाउस रेंट अलाउंस), LTA और होम लोन के ब्याज जैसे दर्जनों डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं।

New Regime (नई व्यवस्था): इसे “सीधा और सरल रास्ता” कहेंगे। इसमें ज्यादातर डिडक्शन का त्याग करके टैक्स की दरें (स्लैब) कम कर दी गई हैं। आपको विभिन्न सेक्शन के तहत निवेश के झंझट में पड़ने की जरूरत नहीं। हालाँकि, इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन सभी के लिए 75,000 रुपये का है। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 से यह नई व्यवस्था डिफॉल्ट रूप से लागू है, मतलब अगर आप कुछ नहीं करते, तो आप इसी में आ जाएंगे। लेकिन आपको चुनने की आजादी अभी भी है।

पुरानी व्यवस्था उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है जो पहले से ही उच्च बचत और निवेश करते हैं, क्योंकि उनके पास कटौती के जरिये अपनी कर योग्य आय कम करने के कई रास्ते होते हैं।

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सिर-से-सिर मुकाबला: 2024-25 के लिए दोनों रेजिम की पूरी तुलना

अब हम दोनों व्यवस्थाओं को एक ही टेबल में रखकर देखेंगे। यह तुलना आपको यह समझने में मदद करेगी कि इनकम टैक्स स्लैब, डिडक्शन और अन्य शर्तें कैसे भिन्न हैं। इसे ध्यान से देखें, क्योंकि आपका टैक्स कैलकुलेशन इन्हीं बिंदुओं पर निर्भर करेगा।

पैरामीटरOld Regime (पुरानी व्यवस्था)New Regime (नई व्यवस्था)
डिफॉल्ट स्टेटसऑप्ट-इन करना पड़ता हैडिफॉल्ट (FY 2025-26 से)
मानक कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन)₹ 50,000 (सैलरी/पेंशन) या ₹ 75,000 (सीनियर सिटीजन)₹ 75,000 (सभी के लिए, स्लैब के तहत ही शामिल)
मुख्य डिडक्शन80C, 80D, HRA, LTA, होम लोन इंटरेस्ट आदि उपलब्धबहुत सीमित। केवल नियोक्ता का PF, NPS, स्टैंडर्ड डिडक्शन।
टैक्स स्लैब (FY 2025-26)पुराने स्लैब लागू।संशोधित नए स्लैब लागू। (₹12.75L तक कर-मुक्त*)
सूटेबल फॉरउच्च बचत/निवेश, HRA/LTA क्लेम, होम लोन वाले।कम बचत, सीमित डिडक्शन, सिम्प्लिसिटी चाहने वाले।

तालिका से साफ है कि अगर आपकी डिडक्शन क्षमता अधिक है तो पुरानी व्यवस्था आकर्षक है, वरना सादगी के लिए नई व्यवस्था बेहतर विकल्प हो सकती है। सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप दोनों व्यवस्थाओं में अपनी कर योग्य आय की गणना करके तुलना करें।

कैलकुलेटर लगाए बिना पता करें: ‘मेरे लिए कौन सा Regime बेहतर है?’

इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको बस तीन चीजें पता होनी चाहिए: 1. आपकी कुल वार्षिक आय, 2. आपकी सालाना बचत/निवेश (80C, 80D, आदि में), और 3. HRA, LTA जैसे दावों का अनुमान।

चलिए इसे दो दोस्तों के उदाहरण से समझते हैं।

प्रोफ़ाइल 1: राहुल (मुंबई में रहते हैं, सैलरी 15 लाख रुपये सालाना)। वह किराए पर रहते हैं और HRA का दावा कर सकते हैं। वह ELSS, PPF और हेल्थ इंश्योरेंस में सालाना लगभग 2.5 लाख रुपये का निवेश करते हैं। राहुल के लिए Old Regime बेहतर होगा क्योंकि उनकी उच्च बचत और HRA के दावे से उनकी टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाएगी, जिससे नई व्यवस्था में मिलने वाले लोअर स्लैब का फायदा खत्म हो जाएगा।

प्रोफ़ाइल 2: प्रिया (अपने स्वयं के घर में रहती हैं, सैलरी 10 लाख रुपये सालाना)। उनका निवेश सीमित है (केवल PF), और वह सादगी और कम कागजी कार्रवाई पसंद करती हैं। प्रिया के लिए New Regime बेहतर हो सकता है क्योंकि सीमित डिडक्शन के बावजूद, नए स्लैब के तहत उनकी टैक्स देनदारी कम आ सकती है और उन्हें निवेश के झंझट से भी छुटकारा मिल जाएगा।

नियम इतना सरल है: अगर आपकी कुल डिडक्शन (80C, 80D, HRA, इंटरेस्ट आदि का योग) एक निश्चित सीमा से अधिक है, तो पुरानी व्यवस्था फायदेमंद है। इस सीमा का पता लगाना ही सही वित्तीय योजना की पहली सीढ़ी है। बाकी, आपको बस अपनी गणना दोनों तरफ से करके देखनी है।

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आपका एक-पेज कर बचत प्लान (2024-25)

चलिए, अब सीधे एक्शन पर आते हैं। यह रहा आपका पर्सनलाइज्ड कर बचत योजना टेम्पलेट। इसे एक पेपर पर उतारें या नोट्स एप में भरें।

स्टेप 1: अपनी कुल ग्रॉस इनकम लिखें। (सैलरी + अन्य आय) : ₹ ______

स्टेप 2: Old Regime के लिए डिडक्शन चेकलिस्ट (अनुमानित मूल्य लिखें)

स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹ 50,000

धारा 80C (PPF, ELSS, बीमा प्रीमियम, आदि): ₹ ______ (मैक्स ₹1.5L)

धारा 80D (हेल्थ इंश्योरेंस): ₹ ______

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): ₹ ______

– होम लोन ब्याज (धारा 24): ₹ ______

– अन्य (LTA, डोनेशन, आदि): ₹ ______

कुल डिडक्शन (A): ₹ ______

स्टेप 3: New Regime के लिए टैक्स कैलकुलेशन

आपकी ग्रॉस इनकम में से केवल नियोक्ता के PF और NPS जैसे कुछ डिडक्शन ही घटाए जा सकते हैं। ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन स्लैब में पहले से एडजस्ट है।

→ नई व्यवस्था के स्लैब के अनुसार सीधे टैक्स निकालें।

स्टेप 4: तुलना

– Old Regime में टैक्स: (ग्रॉस इनकम – कुल डिडक्शन A) पर पुराने स्लैब के हिसाब से टैक्स = ₹ ______

– New Regime में टैक्स: (संशोधित आय) पर नए स्लैब के हिसाब से टैक्स = ₹ ______

स्टेप 5: फाइनल डिसीजन और अगले कदम

दोनों में से जो टैक्स देनदारी कम आए, वही आपके लिए बेहतर व्यवस्था है।

– अगर Old Regime चुनते हैं: अपने नियोक्ता को फॉर्म 10-IE जमा करें और ITR भरते समय इसका चयन करना न भूलें।

– अगर New Regime चुनते हैं: कुछ करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह डिफॉल्ट है। बस ITR में सही विकल्प चुनें।

इस एक पेज के प्लान ने आपकी पूरी टैक्स प्लानिंग स्पष्ट कर दी होगी।

अंतिम निर्णय लेने से पहले याद रखने वाली 5 महत्वपूर्ण बातें

1. एक बार, पूरे साल: एक बार वित्तीय वर्ष के लिए नई व्यवस्था चुन लेने के बाद, आप उसी साल के दौरान पुरानी व्यवस्था में वापस नहीं जा सकते। चुनाव सोच-समझकर करें।

2. बिज़नेस/प्रोफेशनल इनकम: बिज़नेस इनकम वालों के लिए भी यही दोनों विकल्प हैं, लेकिन उनके लिए उपलब्ध कुछ विशिष्ट डिडक्शन (जैसे कि व्यवसायिक व्यय) दोनों व्यवस्थाओं में अलग-अलग तरीके से लागू हो सकते हैं।

3. सेल्फ-अस्सेसमेंट में बदलाव: ITR भरते समय (सेल्फ-अस्सेसमेंट) आप डिफॉल्ट नई व्यवस्था से ऑप्ट-आउट करके पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया थोड़ी तकनीकी है और TDS में बदलाव नहीं करती।

4. भविष्य की योजना: सिर्फ इस साल नहीं, अगले साल की भी सोचें। अगर आने वाले सालों में आपकी बचत बढ़ने वाली है, तो पुरानी व्यवस्था एक बेहतर दीर्घकालिक विकल्प हो सकती है।

5. टैक्स बचत अंतिम लक्ष्य नहीं: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टैक्स बचाना आपका एकमात्र वित्तीय लक्ष्य नहीं होना चाहिए। PPF, ELSS, इंश्योरेंस जैसे निवेश दीर्घकालिक धन निर्माण के लिए हैं, सिर्फ टैक्स बचाने के लिए नहीं। अपनी वित्तीय योजना को व्यापक रखें।

FAQs: ‘Old vs New Tax Regime’

Q: क्या मैं हर साल Old और New Regime के बीच स्विच कर सकता हूँ?
A: हाँ, आप हर नए वित्तीय वर्ष के लिए अलग व्यवस्था चुन सकते हैं। लेकिन एक बार वर्ष का चुनाव करने के बाद, उसी वर्ष के दौरान बदलाव नहीं कर सकते।
Q: अगर मैं New Regime चुनता हूँ, तो क्या मैं PPF, ELSS जैसे 80C निवेश करना बंद कर दूँ?
A: नहीं, टैक्स बचत के अलावा भी ये निवेश आपके वित्तीय लक्ष्यों जैसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बहुत अच्छे हैं। इन्हें जारी रखना चाहिए।
Q: सैलरी इंकम और बिज़नेस इंकम दोनों हैं। मेरे लिए क्या नियम लागू होंगे?
A: आपकी कुल आय (सैलरी + बिज़नेस) पर एक ही चुनी हुई व्यवस्था लागू होगी। आप दोनों तरह की आय के लिए अलग-अलग व्यवस्था नहीं चुन सकते।
Q: New Regime में Standard Deduction ₹75,000 अलग से दिया जाता है या स्लैब में ही शामिल है?
A: यह स्लैब स्ट्रक्चर में पहले से ही समाया हुआ है। आपको इसे अलग से क्लेम करने या घटाने की कोई जरूरत नहीं है।
Q: Old Regime चुनने पर क्या मुझे कोई फॉर्म भरना होगा?
A: हाँ। New Regime डिफॉल्ट है, इसलिए Old Regime चुनने के लिए फॉर्म 10-IE अपने नियोक्ता को देना होगा और ITR भरते समय इसका चयन करना होगा।

अंतिम शब्द: सूचित निर्णय ही सबसे बड़ी कर बचत है

दोस्तों, आज हमने देखा कि Old Regime vs New Regime में से कोई भी ‘गलत’ विकल्प नहीं है। हाँ, एक ‘कम इष्टतम’ विकल्प जरूर हो सकता है, अगर आपने बिना गणना के चुनाव किया। इस लेख में दिया गया एक-पेज प्लान और विस्तृत तुलना आपको वह आत्मविश्वास देगी कि आप अपने लिए सही फैसला ले सकें।

याद रखें, टैक्स प्लानिंग साल में एक बार का रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि एक अच्छी वित्तीय आदत है। इसे अपनी रोजमर्रा की वित्तीय चेतना का हिस्सा बनाएं। सूचित निर्णय लेना ही सबसे बड़ी कर बचत और वित्तीय सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। हैप्पी प्लानिंग!

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VIKASH YADAV

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.

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