
हाय दोस्तों! कल्पना कीजिए, 25 साल की मेहनत और अनगिनत प्रीमियम भरने के बाद आपको एक मोटी रकम मिलती है। पहला एहसास: खुशी का। लेकिन फिर जब आप उस पैसे से अपने बच्चे की इंजीनियरिंग की फीस भरने जाते हैं, तो पता चलता है कि फीस उस रकम से कहीं ज्यादा है। यह कल्पना नहीं, बल्कि रमेश जैसे हजारों LIC पॉलिसी धारकों की सच्चाई है। आज हम इसी ‘खुशी के झटके’ और उसके पीछे के गणित पर बात करने वाले हैं।
इस पूरे परिदृश्य को ही LIC एंडोमेंट ट्रैप कहा जाता है – यानी सुरक्षा और गारंटी के आकर्षक भ्रम में फंसकर, अपने पैसे की असली क्रय शक्ति को बनाए रखने का मौका गंवा देना। आज के इस लेख में, हम सिर्फ डराने नहीं, बल्कि आपको शिक्षित करेंगे। हम वह गुप्त गणित देखेंगे जो आमतौर पर दिखाया नहीं जाता, समझेंगे कि महंगाई कैसे आपके रिटर्न को चुपचाप खा जाती है, और यह भी जानेंगे कि अगर आप खुद इस स्थिति में हैं तो आगे क्या कर सकते हैं।
वह गुप्त गणित जो आपका LIC एजेंट नहीं दिखाता
जब भी कोई एंडोमेंट प्लान बेचा जाता है, उसकी पिच बहुत आकर्षक होती है। एजेंट साहब एक कागज पर साधारण गणित दिखाते हैं: “देखिए, आप 25 साल में कुल 10 लाख प्रीमियम देंगे, और आपको मैच्योरिटी पर 22 लाख मिलेंगे! यानी 12 लाख का शुद्ध फायदा।” यही वह पल होता है जहां जाल बिछना शुरू होता है। इस सरल गणित में पैसे की ‘टाइम वैल्यू’ यानी समय के साथ उसके मूल्य में होने वाली गिरावट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।
असली कहानी तब सामने आती है जब हम CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) का इस्तेमाल करते हैं। साधारण ब्याज आपको बताता है कि कुल कितना फायदा हुआ, लेकिन CAGR बताता है कि हर साल आपकी रकम कितने प्रतिशत की दर से बढ़ी। एक सामान्य 25 साल के LIC एंडोमेंट प्लान का CAGR, बोनस दरों के आधार पर, महज 5.5% से 6% के बीच होता है। यह वह महत्वपूर्ण आंकड़ा है जो अक्सर छिपा रह जाता है।
मान लीजिए आपकी पॉलिसी में आपने 25 साल में कुल 10 लाख रुपये प्रीमियम दिया और आपको 22 लाख रुपये मिले। साधारण गणना से लगेगा कि 120% का रिटर्न मिला। लेकिन CAGR की गणना करें तो पता चलेगा कि आपका पैसा हर साल सिर्फ लगभग 5.8% की दर से बढ़ा है। और यहीं से असली मुसीबत शुरू होती है।
LIC एंडोमेंट प्लान: बिक्री पिच बनाम वास्तविकता
बिक्री पिच (सरल गणित)
वास्तविकता (इन्फ्लेशन के साथ)
*भविष्य मूल्य की गणना 6% वार्षिक मुद्रास्फीति मानकर की गई है। अंतर देखें?
महंगाई – आपके रिटर्न का चुपका चोर
अब हम उस सबसे बड़े दुश्मन पर आते हैं जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है – महंगाई यानी इन्फ्लेशन। इसे एक चुपके चोर की तरह समझिए, जो हर साल आपकी बचत की खरीदने की ताकत (Purchasing Power) चुरा लेता है। 1999 में 5 लाख रुपये से आप जो घर खरीद सकते थे, आज उसी के लिए शायद 50 लाख लग जाएं। यही है महंगाई का जादू, या यूं कहें कि अभिशाप।
यहाँ दो शब्द समझने जरूरी हैं: नॉमिनल रिटर्न और रियल रिटर्न। नॉमिनल रिटर्न वह है जो आपके बैंक अकाउंट में आता है (जैसे LIC का 6%)। रियल रिटर्न वह है जो आप उस पैसे से असल में खरीद पाते हैं। भारत की ऐतिहासिक औसत मुद्रास्फीति दर 6-7% के आसपास रही है। अगर आपका LIC प्लान 6% रिटर्न दे रहा है और महंगाई 7% है, तो आपका रियल रिटर्न है -1%। मतलब, आपके पैसे की वैल्यू बढ़ने के बजाय घट रही है। यही कारण है कि बहुत से लोगों को पॉलिसी मैच्योरिटी के समय निराशा हाथ लगती है।
2026 ट्रैप: क्यों अगले 2 साल खतरनाक हैं?
अब थोड़ा और सटीक बात करते हैं। साल 2026 एक खास वजह से महत्वपूर्ण है। साल 2000-2002 के आसपास, ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची थीं और LIC एंडोमेंट प्लान की बिक्री भी जोरों पर थी। उस समय बेची गई 25 साल की लाखों पॉलिसियां साल 2026 में मैच्योर होंगी।
समस्या यह है कि उस दौर के एजेंटों ने उच्च ब्याज दरों के हिसाब से आकर्षक ‘अनुमानित’ रिटर्न दिखाए होंगे। लेकिन पिछले दो दशकों में ब्याज दरों में गिरावट आई है और LIC की वास्तविक बोनस दरें उन शुरुआती अनुमानों से कम रही हैं। नतीजा? हजारों पॉलिसीहोल्डर्स को 2026 में एक ‘रिटर्न शॉक’ का सामना करना पड़ सकता है, जब उन्हें एहसास होगा कि मैच्योरिटी राशि उनकी उम्मीदों से काफी कम है। अगर आपकी पॉलिसी भी 2026-27 के आसपास मैच्योर हो रही है, तो अभी से तैयारी शुरू कर देना बुद्धिमानी होगी।
अगर आपकी पॉलिसी लंबे समय से चल रही है, तो LIC के नए गारंटीड रिटर्न प्लान के बारे में जानना उपयोगी हो सकता है।
तुलना का सच: LIC एंडोमेंट बनाम अन्य विकल्प
यहाँ एक बात स्पष्ट कर दूं, मैं यह नहीं कह रहा कि एंडोमेंट प्लान बुरा है। यह एक विशिष्ट जरूरत के लिए है – अगर आपको एक डिसिप्लिंड सेविंग टूल चाहिए जो थोड़ा बहुत रिटर्न देने के साथ-साथ लाइफ इंश्योरेंस कवर भी दे, तो यह ठीक है। लेकिन अगर आपका लक्ष्य दीर्घकालिक धन निर्माण है, तो यह सबसे अच्छा विकल्प नहीं है। आइए एक निष्पक्ष तुलना देखते हैं।
LIC एंडोमेंट बनाम अन्य निवेश: 25 साल का सफर
| निवेश विकल्प | अनुमानित CAGR | 10 लाख के निवेश पर अनुमानित अंतिम मूल्य* | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| LIC एंडोमेंट | ~5.8% | ~22.0 लाख | बीमा + डिसिप्लिंड सेविंग |
| इक्विटी SIP (म्यूचुअल फंड) | ~12% (ऐतिहासिक) | ~85.0 लाख | लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन |
| PPF | ~7.1% (वर्तमान) | ~31.5 लाख | सुरक्षित बचत, टैक्स बचत |
| फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | ~6.5% | ~25.7 लाख | शॉर्ट-टर्म सुरक्षा |
*गणना चक्रवृद्धि ब्याज के सिद्धांत पर आधारित। रिटर्न बाजार स्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं। इक्विटी में जोखिम होता है।
तालिका स्पष्ट करती है कि धन निर्माण के लिहाज से इक्विटी म्यूचुअल फंड (SIP) जैसे विकल्पों में अधिक संभावना होती है। हां, उनमें जोखिम भी होता है, लेकिन लंबी अवधि में वे मुद्रास्फीति को मात देने का बेहतर मौका देते हैं। सही निवेश रणनीति जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन बनाना है, न कि सिर्फ ‘गारंटी’ के पीछे भागना।
आपकी मौजूदा LIC पॉलिसी के साथ क्या करें? (क्रियाशील सलाह)
अगर आप पहले से ही एक LIC एंडोमेंट पॉलिसी ले चुके हैं, तो घबराएं नहीं। सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। यहां कुछ व्यावहारिक कदम हैं जो आप उठा सकते हैं:
सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात: अगर आपकी पॉलिसी की मैच्योरिटी में सिर्फ 4-5 साल बाकी हैं, तो कभी भी उसे सरेंडर करने का विचार न करें। सरेंडर वैल्यू आपके दिए हुए कुल प्रीमियम से काफी कम होगी और आपका बीमा कवर भी खत्म हो जाएगा। मैच्योरिटी तक इंतजार करना बेहतर है।
दूसरा विकल्प है ‘पेड-अप’ ऑप्शन। अगर प्रीमियम भारी लग रहा है, तो आप भविष्य के प्रीमियम देना बंद कर सकते हैं। पॉलिसी लैप्स नहीं होगी, और मैच्योरिटी पर आपको ‘पेड-अप वैल्यू’ (जो सरेंडर वैल्यू से ज्यादा होती है) के आधार पर एक राशि मिलेगी, हालांकि यह फुल मैच्योरिटी राशि से कम होगी। तीसरा, अगर आपको पैसों की तत्काल जरूरत है, तो पॉलिसी के खिलाफ लोन लेने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि इस पर ब्याज दर आमतौर पर पर्सनल लोन से कम होती है।
अगर आपकी पुरानी पॉलिसी लैप्स हो गई है, तो LIC का स्पेशल रिवाइवल अभियान 2026 एक अच्छा मौका हो सकता है उसे कम लागत में फिर से शुरू करने का।
भविष्य के लिए स्मार्ट योजना: एंडोमेंट के जाल से कैसे बचें?
तो अगर आप नई योजना बना रहे हैं या अपने भविष्य के निधि को सुरक्षित करना चाहते हैं, तो क्या करें? जवाब सरल है: बीमा और निवेश को अलग-अलग रखें। यह आधुनिक वित्तीय योजना की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीख है।
सुरक्षा (बीमा) के लिए, एक सस्ता टर्म इंश्योरेंस प्लान लें। 50 लाख का कवर लेने के लिए आपको शायद महीने का सिर्फ 500-700 रुपये देना पड़े। बचे हुए पैसे को, अलग से, अपने लक्ष्यों के आधार पर निवेश करें। इसे लक्ष्य-आधारित निवेश कहते हैं। बच्चे की पढ़ाई के लिए 10 साल बाद पैसा चाहिए? इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP शुरू करें। अगले 3 साल में कार खरीदनी है? तब डेट फंड या FD बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
डायवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) कीजिए। सारे अंडे एक टोकरी में न रखें। अपना पोर्टफोलियो इक्विटी, डेट, और सुरक्षित विकल्पों के बीच बांटें। और सबसे जरूरी, हर 5 साल में अपनी पूरी वित्तीय योजना की समीक्षा जरूर करें। जिंदगी के लक्ष्य बदलते हैं, आपकी निवेश रणनीति भी बदलनी चाहिए।
अंतिम विचार: सुरक्षा चाहिए या वृद्धि? दोनों मिल सकते हैं
दोस्तों, इस पूरी चर्चा का मकसद आपको डराना या LIC को बुरा-भला कहना नहीं है। मकसद है सिर्फ जागरूकता फैलाना। वित्तीय दुनिया में, जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है। एंडोमेंट प्लान एक विकल्प है, लेकिन शायद आपकी दीर्घकालिक जरूरतों के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं।
याद रखिए, सुरक्षा और वृद्धि दोनों हासिल करना संभव है, बशर्ते आप दोनों के लिए अलग-अलग उपकरणों का सही इस्तेमाल करें। LIC एंडोमेंट ट्रैप से बचने का रास्ता जटिल नहीं है – बस बीमा को बीमा की तरह और निवेश को निवेश की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दें। आपका वित्तीय भविष्य आपके हाथ में है, उसे सही दिशा देने का विश्वास अपने आप में रखें।
LIC एंडोमेंट ट्रैप: पाठकों के सवाल, विशेषज्ञों के जवाब
Q: क्या मुझे अपनी मौजूदा LIC एंडोमेंट पॉलिसी सरेंडर कर देनी चाहिए?
Q: अगर LIC एंडोमेंट अच्छा नहीं है, तो फिर लोग इसे क्यों खरीदते हैं?
Q: क्या LIC की कोई अन्य प्लान इस ‘ट्रैप’ से बेहतर है?
Q: मैंने अभी एक नई एंडोमेंट पॉलिसी ली है। मुझे क्या करना चाहिए?
Q: क्या मुद्रास्फीति सभी निवेशों को प्रभावित नहीं करती?

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes
Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in
the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and
India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial
decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.







