आयुष्मान भारत का ‘काला सच’ 2026: कैंसर और हार्ट सर्जरी के लिए बड़े प्राइवेट अस्पताल क्यों नहीं ले रहे आपका कार्ड? (एक्सपोज़)

On: January 25, 2026 5:00 PM
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आयुष्मान भारत का 'काला सच' 2026: कैंसर और हार्ट सर्जरी के लिए बड़े प्राइवेट अस्पताल क्यों नहीं ले रहे आपका कार्ड? (एक्सपोज़)

हाय दोस्तों! आज की कहानी बहुत दुखद है। राम सिंह (काल्पनिक नाम), जिनके पास आयुष्मान भारत कार्ड है, को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। उन्हें दिल्ली के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में कीमोथेरेपी की जरूरत थी। लेकिन जब उनके परिवार ने आयुष्मान भारत कार्ड दिखाया, तो अस्पताल प्रशासन ने साफ मना कर दिया। “हम इस कार्ड से यह इलाज नहीं कर सकते,” यह कहकर उन्हें दरवाजा दिखा दिया गया। राम सिंह का परिवार आज भी ऋण और डर के बीच फंसा है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि 2026 का एक बड़ा और काला सच है।

यह लेख इसी ‘काले सच’ की पड़ताल करेगा। हम समझेंगे कि आयुष्मान भारत जैसी क्रांतिकारी योजना के बावजूद, कैंसर और हार्ट सर्जरी जैसे जानलेवा इलाजों के लिए बड़े प्राइवेट अस्पताल आपका कार्ड क्यों ठुकरा रहे हैं। इसके पीछे की वित्तीय, प्रशासनिक वजहों और आपके लिए मौजूद रास्तों पर एक गहरी नज़र।

आयुष्मान भारत: वादा और वास्तविकता का अंतर

आयुष्मान भारत या पीएमजेएवाई दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसका वादा सीधा और साफ है: गरीब और वंचित परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज दिलाना। इसमें कैंसर, हार्ट की बीमारियाँ, न्यूरोसर्जरी जैसी 1500 से ज्यादा प्रक्रियाएं शामिल हैं। यह एक सरकारी योजना है जिसका लक्ष्य कोई भी परिवार बीमारी के कारण गरीबी में न धकेला जाए।

आधिकारिक तौर पर, योजना का विस्तार जारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा द्वारा श्योपुर और सिंगरौली में नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों का उद्घाटन किया गया है। इसी तरह, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य नीति पर नीति निर्माताओं के एक फोरम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया। ये प्रयास दिखाते हैं कि सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर काम कर रही है।

चिंता का ग्राफ: क्यों बढ़ रही है अस्पतालों की ‘ना’?

यह समस्या अचानक नहीं, बल्कि कई जटिल कारणों से पनपी है। अस्पताल भुगतान की यह उलझन एक ग्राफ से स्पष्ट समझिए।

बड़े प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत कार्ड लेने से क्यों कतरा रहे?

देरी से/कम भुगतान
सरकार से समय पर पैसा न मिलना अस्पताल के कैश फ्लो को तोड़ देता है।
जटिल कागजी प्रक्रिया
क्लेम दाखिल करने में बहुत सारी औपचारिकताएं और समय लगता है।
पैकेज दरें अपर्याप्त
खासकर कैंसर, हार्ट जैसे महंगे इलाज की वास्तविक लागत पैकेज से कहीं ज्यादा है।
अधिक जाँच/लालफीताशाही
हर क्लेम पर सरकारी अधिकारियों की सख्त जांच, जिसमें समय लगता है।

1.2 लाख करोड़ का ‘बकाया’ बोझ: वह सच जो सरकारी आंकड़े छुपाते हैं

आइए सीधे मूल समस्या पर आते हैं। अस्पताल भुगतान का सबसे बड़ा संकट यह है कि देशभर के प्राइवेट अस्पतालों पर आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार का लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये बकाया है। इस राशि को समझने के लिए इतना ही काफी है कि इस पैसे से देश में 200 से ज्यादा नए अत्याधुनिक अस्पताल बन सकते थे।

यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि एक कड़वा सच है। पत्रकारिता की रिपोर्ट्स इसकी पुष्टि करती हैं:

“प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जूझ रहे हैं, क्योंकि सरकार पर उनका लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये बकाया है।”

इस बकाये का सीधा असर अस्पताल के कैश फ्लो पर पड़ता है। सोचिए, कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक टार्गेटेड थेरेपी की दवा ही लाखों रुपये की होती है। अस्पताल को यह दवा पहले से ही खरीदनी पड़ती है। अगर सरकार से पैसा समय पर नहीं मिलेगा, तो अस्पताल के लिए यह एक नुकसान का सौदा बन जाता है। यहीं से अस्पतालों का रुख बदलता है और वे एक अतिरिक्त निजी मेडिक्लेम को प्राथमिकता देने लगते हैं।

आयुष्मान भारत के नए गोल्डन कार्ड (70+ योजना) के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़ें।

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कैंसर और हार्ट सर्जरी: ‘लॉस-मेकिंग’ बिजनेस क्यों बन गए?

कैंसर इलाज और हार्ट सर्जरी में सबसे बड़ी समस्या लागत का अंतर है। आयुष्मान भारत की पैकेज दरें (जो सरकार तय करती है) अक्सर इन जटिल इलाजों की वास्तविक लागत को कवर नहीं कर पातीं। इसमें विशेष दवाएं, महंगे इम्प्लांट (जैसे स्टेंट), और विशेषज्ञ डॉक्टरों की फीस शामिल होती है।

एक उदाहरण से समझते हैं। नीचे की तुलना टेबल दिखाती है कि एक कैंसर की कीमोथेरेपी साइकिल के लिए आयुष्मान की दर और एक बड़े प्राइवेट अस्पताल की वास्तविक लागत में कितना बड़ा अंतर है। यह अंतर ही अस्पतालों को निजी स्वास्थ्य बीमा या मेडिक्लेम को तरजीह देने पर मजबूर कर देता है।

कैंसर की कीमोथेरेपी (एक साइकिल): आयुष्मान रेट vs प्राइवेट अस्पताल की वास्तविक लागत

इलाज का हिस्साआयुष्मान पैकेज रेट (अनुमानित)प्राइवेट अस्पताल की वास्तविक लागत (अनुमानित)अंतर
बेसिक कीमो दवाएं व बिस्तर शुल्क₹ 50,000₹ 45,000 – ₹ 60,000लगभग बराबर
टार्गेटेड थेरेपी / इम्यूनोथेरेपी की दवापैकेज में शामिल (सीमित)₹ 1,00,000 – ₹ 3,00,000+बहुत अधिक
विशेषज्ञ डॉक्टर परामर्श फीसपैकेज में शामिल₹ 5,000 – ₹ 15,000 (प्रति सत्र)अतिरिक्त खर्च
सहायक दवाएं (संक्रमण रोधी, आदि)सीमित₹ 10,000 – ₹ 20,000अतिरिक्त खर्च
कुल अनुमानित लागत (एक साइकिल)₹ 50,000 – ₹ 80,000₹ 1,60,000 – ₹ 4,00,000+₹ 1,00,000 से ₹ 3,00,000+ का अंतर

मरीज फंसे बीच में: ‘कार्ड है पर इलाज नहीं’ का दंश

इस संकट का सबसे ज्यादा दंश झेल रहा है आम मरीज। ये कुछ ऐसे ही वास्तविक परिदृश्य हैं जो हर दिन देश में घट रहे हैं: 1. पहले पैसे दो: अस्पताल कहता है, “कार्ड से कैशलेस तो नहीं होगा, लेकिन अगर आप पहले 2 लाख रुपये जमा करा दें, तो इलाज शुरू कर सकते हैं।” यह मरीज समस्या को और बढ़ाता है। 2. दूर के अस्पताल भेजना: मरीज को कहा जाता है कि “हमारे यहाँ बेड खाली नहीं हैं, आप इस शहर से 200 किमी दूर एक एमरजिंग अस्पताल में जाइए।” परिवार के लिए यात्रा और रहने का अतिरिक्त बोझ। 3. जमीन बेचो या कर्ज लो: आखिरी रास्ता बचता है घर की जमीन बेचने या भारी ब्याज पर कर्ज लेने का। एक बीमारी पूरे परिवार को वित्तीय तबाही के कगार पर ला देती है।

यह स्थिति योजना के मूल विश्वास को खत्म कर रही है। लोगों का इस सरकारी योजना और स्वास्थ्य सेवाओं पर से भरोसा डगमगा रहा है। एक तरफ वादा है कैशलेस इलाज का, दूसरी तरफ हकीकत है इलाज से वंचित रह जाने की।

क्या है समाधान? आप (मरीज) अभी क्या कर सकते हैं?

तत्काल कार्रवाई के चरण (अगर इलाज जरूरी है)

अगर कोई अस्पताल आपका आयुष्मान भारत कार्ड लेने से मना करता है, तो घबराएं नहीं। ये कदम उठाएं: 1. हेल्पलाइन पर शिकायत: सबसे पहले आयुष्मान हेल्पलाइन 14555 या 1444 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करें। क्लेम नंबर लें। 2. जिला अधिकारी से संपर्क: अपने जिले के आयुष्मान भारत नोडल अधिकारी का पता करें और उन्हें लिखित में स्थिति बताएं। 3. लिखित कारण मांगें: अस्पताल से लिखित में मना करने का औपचारिक कारण मांगें। यह दस्तावेज बाद में काम आएगा। 4. सरकारी विकल्प तलाशें: नजदीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज या सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज की संभावना जांचें।

प्राइवेट अस्पतालों द्वारा कैशलेस इलाज से मना करने की समस्या पर गहरी जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

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दीर्घकालिक तैयारी

तत्काल समस्या से निपटने के साथ-साथ भविष्य के लिए भी तैयारी जरूरी है: 1. दोहरी सुरक्षा कवच: आयुष्मान भारत कार्ड को बेसिक कवर के रूप में जरूर रखें, लेकिन साथ ही एक अच्छा निजी मेडिक्लेम (हेल्थ इंश्योरेंस) भी लें। यह आपको बड़े प्राइवेट अस्पतालों में विकल्प और बेहतर कैशलेस सुविधा देगा। 2. हेल्थ इमरजेंसी फंड: हर महीने थोड़ी बचत करके एक अलग हेल्थ सेविंग्स फंड बनाएं। इसे किसी ऐसी जगह रखें जहाँ से तुरंत निकाला जा सके। 3. सरकारी विस्तार पर नजर: सरकारी स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार (जैसे नए मेडिकल कॉलेज) पर नजर रखें। भविष्य में ये बड़े और सस्ते इलाज का मुख्य केंद्र बन सकते हैं।

FAQs: ‘आयुष्मान भारत कार्ड’

Q: क्या सभी प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत कार्ड नहीं ले रहे?
A: नहीं, सभी नहीं। मुख्य समस्या बड़े प्राइवेट अस्पतालों में है। छोटे एमरजिंग अस्पताल अभी भी कार्ड लेते हैं।
Q: अगर अस्पताल कार्ड लेने से मना करे, तो क्या मैं उसे बाध्य कर सकता हूँ?
A: सीधे तौर पर नहीं। लेकिन आयुष्मान अथॉरिटी से शिकायत कर सकते हैं, जो अस्पताल पर कार्रवाई कर सकती है।
Q: क्या यह समस्या सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित है?
A: नहीं, यह एक राष्ट्रव्यापी चुनौती है। हालाँकि, भुगतान की गति के आधार पर तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।
Q: क्या सरकार इस बकाये की समस्या को हल करने पर काम कर रही है?
A: हाँ, सरकार डिजिटल क्लेम प्रोसेसिंग को तेज कर रही है। लेकिन 1.2 लाख करोड़ का बकाया तुरंत हल होने वाली समस्या नहीं है।
Q: आयुष्मान कार्ड के साथ कोई अन्य बीमा लेने की सलाह क्यों दी जाती है?
A: क्योंकि निजी बीमा बड़े अस्पतालों में विकल्प और बेहतर सुविधा देता है। दोनों योजनाएं एक-दूसरे की पूरक हो सकती हैं।

निष्कर्ष: एक सामूहिक जिम्मेदारी

आयुष्मान भारत निस्संदेह एक क्रांतिकारी सरकारी योजना है जिसने लाखों लोगों को आशा दी है। लेकिन, इसकी सफलता के लिए सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार को समय पर भुगतान और प्रक्रिया सरल बनानी होगी। अस्पतालों को नैतिकता और सामाजिक दायित्व निभाना होगा। और हमें, जनता को, जागरूक रहकर अपने अधिकारों का उपयोग करना होगा।

भविष्य की राह में सरकारी अस्पतालों के विस्तार से दबाव कम होने की उम्मीद है। लेकिन तब तक, हमें सक्रिय और तैयार रहना होगा। जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है। अपने आयुष्मान भारत कार्ड के बारे में पूरी जानकारी रखें, शिकायत करने से न घबराएं, और एक अच्छी व्यक्तिगत स्वास्थ्य योजना बनाएं। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।

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VIKASH YADAV

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.

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