
हाय दोस्तों! कल्पना कीजिए, आपने पूरी ईमानदारी से अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। कुछ महीने बाद अचानक आपके फोन पर एक एसएमस आता है – “आयकर विभाग की ओर से एक नोटिस जारी किया गया है”। दिल की धड़कन तेज हो जाती है। लॉग इन करते ही आप देखते हैं एक AI टैक्स नोटिस, जिसमें लिखा है कि आपकी घोषित आय और सरकार के रिकॉर्ड (AIS) में हज़ारों रुपये का अंतर है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि आजकल हजारों सैलरीड और फ्रीलांस प्रोफेशनल्स की रियलिटी बन चुका है। और सबसे डरावनी बात? कई बार महज ₹100 के TDS मिसमैच को ‘अनडिस्क्लोज्ड आय’ मानकर आप पर ₹10,000 तक की पेनल्टी ठोक दी जा सकती है।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल ITR फाइल करने में फॉर्म 26AS और AIS में अंतर को अनदेखा करना एक प्रमुख गलती रही, जिसके कारण रिफंड रुके और नोटिस मिले। लेकिन घबराइए नहीं। यह गाइड आपको AIS vs Form 26AS Mismatch की जड़ को समझने, उसके 5 बड़े कारणों को जानने और 7 आसान, एक्शनेबल स्टेप्स के जरिए इस मिसमैच को सुलझाकर आने वाले AI टैक्स नोटिस से बचने में मदद करेगी। चलिए, शुरू करते हैं।
पहला कदम: समझें AIS और Form 26AS में ‘बुनियादी’ फर्क
सबसे पहले यह समझ लें कि ये दोनों डॉक्यूमेंट्स अलग-अलग काम के हैं। Form 26AS आपका “टैक्स क्रेडिट कार्ड” है। यह आपको बताता है कि आपके या आपकी ओर से कितना टैक्स (TDS/TCS) सरकार के खाते में जमा हुआ है। वहीं, Annual Information Statement (AIS) आपकी “फाइनेंशियल लाइफ की डायरी” है। इसमें सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि बैंक में बड़ी जमा, म्यूचुअल फंड निवेश, शेयर बिक्री, विदेश से पैसा आना – यानी आपकी लगभग सारी महत्वपूर्ण वित्तीय हलचल दर्ज होती है।
AIS ज्यादा व्यापक है, इसमें सेविंग अकाउंट इंटरेस्ट, शेयर ट्रांजैक्शन, फॉरेन रिमिटेंस जैसी जानकारी भी शामिल है, जो 26AS में नहीं होती। इसलिए अब ITR फाइल करते समय AIS को प्राथमिक दस्तावेज माना जाना चाहिए। नीचे दिया गया टेबल एक नजर में सब कुछ क्लियर कर देगा।
| पैरामीटर | फॉर्म 26AS | वार्षिक सूचना विवरण (AIS) |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | टैक्स जमा और TDS/TCS का सारांश | करदाता की सम्पूर्ण वित्तीय गतिविधियों का विवरण |
| डेटा स्रोत | मुख्यतः डिडक्टर्स (TDS/TCS रिटर्न) | बैंक, म्यूचुअल फंड, रजिस्ट्रार, डिडक्टर्स सहित 10+ स्रोत |
| कवरेज | टैक्स से जुड़े लेनदेन | सभी महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन (टैक्सेबल और नॉन-टैक्सेबल) |
| फीडबैक का विकल्प | नहीं | हाँ (गलत जानकारी को चुनौती दे सकते हैं) |
| ITR फाइलिंग के लिए प्राथमिकता | पहले प्राथमिक था | 2023-24 से अब यह प्राथमिक दस्तावेज है |
यहाँ वह चार्ट है जो आपको एक नज़र में अंतर समझा देगा
वित्तीय जानकारी का कवरेज (अनुमानित)
निष्कर्ष: AIS, Form 26AS की तुलना में आपकी वित्तीय प्रोफाइल की 25% अतिरिक्त जानकारी दिखाता है, जो मिसमैच का मुख्य कारण है।
मिसमैच के 5 बड़े कारण: जानिए कहाँ चूक हो जाती है?
दोस्तों, AIS vs Form 26AS Mismatch आमतौर पर आपकी गलती नहीं, बल्कि सिस्टम, टाइमिंग और डेटा इनपुट में अंतर का नतीजा होता है। जानते हैं वो 5 मुख्य कारण जो आपको नोटिस के रिस्क में डाल सकते हैं।
1. TDS डिडक्शन में टाइमिंग का गैप
आपकी कंपनी ने मार्च की सैलरी से TDS काट लिया और आपकी सैलरी स्लिप में भी दिख गया। लेकिन उस कंपनी को वह TDS सरकार को जमा करने और फिर TDS रिटर्न फाइल करने में कुछ हफ्ते या महीने लग सकते हैं। जब तक वह रिटर्न फाइल नहीं होता, आपके Form 26AS में वह TDS क्रेडिट नहीं दिखेगा। इस टाइमिंग गैप के कारण मिसमैच होता है।
2. AIS में ‘अतिरिक्त’ इनफॉर्मेशन
यह सबसे कॉमन कारण है। मान लीजिए आपने कोई म्यूचुअल फंड यूनिट बेची या बैंक में ₹10 लाख से ज्यादा जमा हुआ। यह ट्रांजैक्शन AIS में तो आ जाएगा (बैंक/म्यूचुअल फंड हाउस की रिपोर्टिंग से), लेकिन अगर आपने इसे ITR में ‘कैपिटल गेन’ या ‘अन्य आय’ के तहत डिक्लेयर नहीं किया, तो मिसमैच पैदा होगा।
3. पैन कार्ड डिटेल्स में गड़बड़ी
अगर आपका बैंक, क्लाइंट या म्यूचुअल फंड कंपनी TDS काटते या इंटरेस्ट क्रेडिट करते समय आपका PAN नंबर गलत दर्ज कर देती है, तो वह आय/टैक्स क्रेडिट किसी और के AIS/26AS में चला जाता है। आपके पास सारे रिकॉर्ड होंगे, लेकिन आयकर पोर्टल पर वह दिखेगा ही नहीं।
4. प्री-फिल्ड डेटा पर अंधा भरोसा
ITR फॉर्म के प्री-फिल्ड डेटा (जो 26AS से आता है) और AIS की मैनुअल तुलना न करना सबसे बड़ी भूल है जो ज्यादातर लोग करते हैं। प्री-फिल्ड डेटा सिर्फ एक सुविधा है, वह पूरी तरह सही हो यह जरूरी नहीं। आपको खुद चेक करना होगा।
5. फ्रीलांसर्स और बिजनेस ओनर्स के लिए खास समस्या
फ्रीलांसर्स के साथ यह दिक्कत आम है: क्लाइंट पेमेंट करते वक्त TDS काट लेता है, लेकिन TDS रिटर्न फाइल नहीं करता। इससे आपकी आय तो AIS में दर्ज हो जाती है, लेकिन उस पर मिला TDS क्रेडिट आपके 26AS में नहीं आता। नतीजा? आय ज्यादा दिखेगी, टैक्स क्रेडिट कम।
‘AI टैक्स नोटिस’ क्या है? यह कैसे काम करता है?
AI टैक्स नोटिस कोई रहस्यमय या डरावनी चीज नहीं है। यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑटोमेटेड सिस्टम द्वारा जनरेट होने वाला एक अलर्ट है। सोचिए, आयकर विभाग के पास अब आपकी फाइनेंशियल जानकारी का एक विशाल डेटाबेस (AIS) है।
जैसे ही आप ITR फाइल करते हैं, सिस्टम आपके द्वारा घोषित आय (ITR में) और उसके पास मौजूद आय (AIS में) की रीयल-टाइम तुलना करने लगता है। किसी भी तरह का बड़ा या सिस्टमैटिक अंतर मिलते ही, यह ऑटोमेटिकली एक नोटिस जनरेट कर देता है। यह नोटिस या तो सूचनात्मक हो सकता है (बस आपको अंतर की जानकारी देने के लिए), या फिर एक डिमांड नोटिस (जिसमें आपसे एक निश्चित समय में जवाब या स्पष्टीकरण मांगा जाता है)।
इन नोटिस को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए, चाहे अंतर कितना भी छोटा क्यों न हो। अनदेखा करने से प्रोसीजरल पेनल्टी और जुर्माने का रिस्क बढ़ जाता है।
₹100 का मिसमैच, ₹10,000 की पेनल्टी: गणित समझें
यह सुनने में अतिशयोक्ति लगे, लेकिन टैक्स कानून (सेक्शन 270A) के तहत अंडर-रिपोर्टिंग या मिस-रिपोर्टिंग पर 50% से 200% तक की टैक्स पेनल्टी लग सकती है। समझिए कैसे एक छोटी सी चूक बड़ी मुसीबत बन जाती है।
मान लीजिए, आपकी सैलरी से ₹50,000 का TDS कटा। लेकिन आपकी कंपनी ने TDS रिटर्न फाइल करते समय गलती से ₹49,900 ही दर्ज किया। आपने प्री-फिल्ड डेटा देखकर ITR में टैक्स पेड भी ₹49,900 लिख दिया। ₹100 का यह अंतर सिस्टम के लिए ‘अनडिस्क्लोज्ड आय’ का संकेत हो सकता है। इस पर 200% पेनल्टी यानी ₹200 + इंटरेस्ट लग सकता है। लेकिन असली खतरा प्रोसीजरल पेनल्टी में है – नोटिस का जवाब न देना, गलत जवाब देना, या देर से जवाब देना। इन सबको मिलाकर जुर्माना हजारों रुपये तक पहुंच जाता है। जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है, ऐसी छोटी विसंगतियों के कारण करदाताओं को अनुपालन संबंधी नोटिस और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
AI नोटिस से बचने के 7 आसान तरीके (2026 एक्शन प्लान)
नोटिस आने के बाद एक्शन लेने से कहीं बेहतर है, पहले से सावधानी बरतना। ये 7 स्टेप्स आपकी ‘ITR फाइलिंग प्री-चेकलिस्ट’ हैं, जो आपको टैक्स नोटिस से बचाव में मदद करेंगे।
तरीका 1: सबसे पहले AIS डाउनलोड और ‘फीडबैक’ देना
इनकम टैक्स पोर्टल लॉग इन करें > ‘Annual Information Statement (AIS)’ पर जाएं > सही वित्तीय वर्ष (जैसे 2024-25) चुनें > ‘AIS’ विकल्प पर क्लिक कर PDF देखें। अब सबसे जरूरी स्टेप: अगर कोई ट्रांजैक्शन गलत दिख रहा है (किसी और का, डुप्लिकेट), तो उसके सामने ‘फीडबैक’ ऑप्शन पर क्लिक कर ‘यह मेरा नहीं है’ मार्क करके सबमिट कर दें। यह भविष्य के मिसमैच को रूट लेवल पर खत्म कर देगा।
तरीका 2: AIS vs Form 26AS की लाइन-बाय-लाइन तुलना
दोनों डॉक्यूमेंट्स को साथ रखकर एक साधारण चेकलिस्ट पर काम करें: (1) TDS कटर का नाम, (2) TDS की रकम, और (3) यह कि टैक्स सिर्फ काटा ही नहीं गया, बल्कि जमा भी किया गया है। ये तीनों डिटेल दोनों जगह मैच होनी चाहिए। कोई अंतर मिले तो उसे नोट कर लें।
तरीका 3: ‘प्रोविडेंट फंड इंटरेस्ट’ और ‘सेविंग्स अकाउंट इंटरेस्ट’ चेक करें
AIS के ‘इंटरेस्ट’ सेक्शन में जाएं। अक्सर PPF या सेविंग अकाउंट का इंटरेस्ट ITR में डिक्लेयर नहीं किया जाता, क्योंकि यह टैक्स फ्री होता है। लेकिन ध्यान रखें, सेविंग अकाउंट पर ₹10,000 से ज्यादा के इंटरेस्ट पर टैक्स देनदारी हो सकती है। AIS में दिख रही यह आय अगर आपने डिक्लेयर नहीं की, तो मिसमैच होगा।
तरीका 4: अपने बैंक स्टेटमेंट और फॉर्म 16/16A से क्रॉस-वेरिफाई
यह आपका ग्राउंड जीरो ट्रुथ है। AIS या 26AS में दिख रही हर एक ट्रांजैक्शन को अपने पर्सनल रिकॉर्ड – बैंक स्टेटमेंट, पेमेंट रिसीट, या कंपनी/क्लाइंट से मिले फॉर्म 16/16A से मैच करके देखें। सिर्फ टैक्स पोर्टल के डेटा पर भरोसा न करें, अपने रिकॉर्ड को प्राथमिकता दें।
तरीका 5: मिसमैच मिलने पर ऐसे करें कार्रवाई
अगर TDS मिसमैच मिलता है (आपके रिकॉर्ड में ज्यादा, 26AS में कम), तो तुरंत डिडक्टर (आपकी कंपनी या क्लाइंट) से संपर्क करें। उन्हें बताएं कि उन्हें TDS रिटर्न में सुधार (चालान करेक्शन) करने की जरूरत है। ध्यान रखें, उनके सुधारने के बाद आपके 26AS में अपडेट आने में 2-3 महीने लग सकते हैं, इसलिए धैर्य रखें।
तरीका 6: ITR फाइल करते समय ‘AIS’ को बेस मानें
ITR का प्री-फिल्ड डेटा ब्लाइंडली एक्सेप्ट न करें। AIS में दिख रही सभी सही आय को ITR में जरूर डिक्लेयर करें, भले ही वह आय Form 26AS में न दिख रही हो। अगर किसी आय के TDS क्रेडिट का मिसमैच है, तो आय पूरी दर्ज करें, और TDS क्लेम वही करें जो 26AS में दिख रहा है। आप रिटर्न के ‘ऑब्जर्वेशन’ सेक्शन में इस मिसमैच का संक्षिप्त स्पष्टीकरण भी दे सकते हैं।
तरीका 7: ITR फाइलिंग के बाद AIS मॉनिटरिंग जारी रखें
ITR फाइल करने के बाद भी आराम मत बैठिए। 3-4 महीने बाद फिर से अपना AIS चेक करें। कई बार डिडक्टर्स देरी से TDS रिटर्न फाइल करते हैं, जिससे आपके AIS में नई एंट्री आ सकती है। अगर कोई बड़ा अंतर दिखे (जो आपने ITR में डिक्लेयर नहीं किया), तो रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने पर विचार करें।
अगर AI नोटिस आ ही गया है, तो क्या करें?
सबसे पहले, घबराएं नहीं। घबराहट में गलत कदम उठाने से बचें। नोटिस में दी गई समय सीमा (आमतौर पर 15-30 दिन) के भीतर जवाब देना जरूरी है। नोटिस को अनदेखा करना सबसे बुरा विकल्प है।
कदम-दर-कदम प्रोसेस फॉलो करें: 1. सबसे पहले नोटिस में बताए गए अंतर को अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड (बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16, पेमेंट रिसीट) से वेरिफाई करें। 2. अगर आपकी गलती है (कोई आय डिक्लेयर करना भूल गए थे), तो रिवाइज्ड रिटर्न (ITR-U) फाइल करें, बकाया टैक्स + इंटरेस्ट जमा करें और इसकी डिटेल के साथ नोटिस का जवाब दें। 3. अगर गलती सिस्टम या डिडक्टर (कंपनी/क्लाइंट) की है, तो सबूत (जैसे बैंक स्टेटमेंट जहां TDS काटा गया, फॉर्म 16A, डिडक्टर से ईमेल कम्युनिकेशन) इकट्ठा करके ऑनलाइन पोर्टल पर ही रिप्लाई में अटैच करें।
अंतिम सलाह: 2026 के टैक्स सीज़न के लिए एक पेज की प्लानिंग
आइए, सारी बातों को एक साधारण, एक्शनेबल चेकलिस्ट में समेट लेते हैं जिसे आप 2026 के टैक्स अपडेट के लिए फॉलो कर सकते हैं: (1) जनवरी-मार्च: नए साल में ही AIS चेक करना शुरू कर दें और गलत ट्रांजैक्शन पर फीडबैक दें। (2) अप्रैल-जून: सभी डिडक्टर्स (कंपनियों, क्लाइंट्स) से फॉर्म 16/16A इकट्ठा कर लें। (3) जुलाई: AIS, 26AS और अपने रिकॉर्ड की त्रिकोणीय तुलना करके ITR फाइल करें।
AIS एक टूल है, दुश्मन नहीं। इसे समझकर और नियमित रूप से चेक करके आप न सिर्फ डरावने AI नोटिस से बच सकते हैं, बल्कि अपनी टैक्स कॉम्प्लायंस को भी मजबूत और सटीक बना सकते हैं। थोड़ी सी सावधानी और नियमित जांच आपको बड़ी परेशानी और जुर्माने से बचा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
FAQs: ‘AIS vs Form 26AS Mismatch’
Q: क्या AIS में दिखाई गई हर आय पर टैक्स देना पड़ता है?
Q: अगर AIS में किसी और का लेनदेन दिख रहा है तो क्या करूं?
Q: Form 26AS और AIS में अंतर होने पर ITR फाइल करते समय किसका डेटा भरूं?
Q: क्या AI नोटिस सिर्फ ऑनलाइन ही आता है? SMS या ईमेल से कैसे पहचानूं?
Q: क्या फ्रीलांसर्स के लिए AIS मिसमैच का खतरा ज्यादा है?

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes
Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in
the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and
India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial
decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.







