
हाय दोस्तों! कल ही मेरे एक रिश्तेदार, जो एक बढ़ई हैं, का फोन आया। आवाज में डर साफ था। उन्होंने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत दो लाख रुपये का लोन लिया था। पिछले तीन महीने से उनकी किस्त नहीं कट पा रही थी। आज उन्हें पता चला कि उनका नाम CIBIL डिफॉल्टर की लिस्ट में आ गया है। अब वे बैंक जाने से भी डर रहे हैं। उनकी कहानी अकेली नहीं है। आज हम बात करेंगे इसी ‘सपने’ के अंधेरे पहलू की।
आप या आपका कोई जानने वाला भी क्या इस ‘सस्ते कर्ज’ की लालच में फंसने की सोच रहा है? सावधान हो जाइए। यह लेख आपको पीएम विश्वकर्मा योजना के उन छुपे हुए नियमों और जोखिमों से आगाह करेगा, जिनके बारे में शायद आपको नहीं बताया गया। यह जानना जरूरी है कि कैसे यह योजना एक वित्तीय PM विश्वकर्मा लोन ट्रैप का रूप ले सकती है।
PM विश्वकर्मा योजना: जानिए बुनियादी बातें (वह सब कुछ जो आपको पता होना चाहिए)
सबसे पहले, यह समझ लें कि पीएम विश्वकर्मा योजना एक बहुत अच्छी पहल है। इसका उद्देश्य देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों (जैसे बढ़ई, सुनार, मोची, दर्जी) को वित्तीय मदद देना है, ताकि वे अपना कारोबार आधुनिक तरीके से चला सकें।
इस योजना के तहत, लाभार्थियों को 1 लाख रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का सरकारी योजना ऋण मिल सकता है। ब्याज दर भी काफी कम (लगभग 5%) है, जिसमें सरकार सब्सिडी देती है। आवेदन प्रक्रिया भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से संभव है। पात्रता के लिए आपका संबंधित पारंपरिक व्यवसाय से होना और आवश्यक दस्तावेजों का होना जरूरी है।
आवेदन के बाद, बैंक आपकी पात्रता जांचेगा और फिर ऋण मंजूर कर देगा। सब कुछ बहुत आसान और सकारात्मक लगता है, है ना? तो फिर समस्या कहाँ आ रही है? दरअसल, समस्या शुरू होती है ऋण मिलने के बाद, जब विश्वकर्मा योजना की बारीकियों को न समझ पाने के कारण लोग फंस जाते हैं।
योजना का दूसरा पहलू: इरादा अच्छा, नतीजे चौंकाने वाले (छुपे हुए नियम)
समस्या की जड़ है जानकारी का अभाव और प्रक्रिया की जटिलता। बाहरी रिपोर्ट्स बताती हैं कि आजकल पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाले ‘सस्ते कर्ज’ को लेकर एक गंभीर चिंता सामने आ रही है, जहाँ कई लाभार्थी अनजाने में एक ऋण जाल में फंसते जा रहे हैं। ऋण लेने के बाद, कुछ लाभार्थियों को चुकौती की शर्तों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।
छुपा नियम 1: ‘मोरेटोरियम’ या राहत अवधि का भ्रम। कई लोगों को लगता है कि ऋण मिलने के बाद शुरुआती 6 महीने तक कोई किस्त नहीं देनी होती। यह गलत है। ज्यादातर मामलों में, केवल ब्याज में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन मूल राशि की कर्ज चुकौती शुरू हो जाती है। इसे न समझ पाना पहली गलती बन जाता है।
छुपा नियम 2: बैंक और MFI के बीच संचार गैप। कई बार ये ऋण सीधे बैंक की बजाय माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन (MFI) के जरिए प्रोसेस होते हैं। बैंक और MFI के बीच समन्वय की कमी के कारण किस्त की सूचना सही समय पर आप तक नहीं पहुँचती। आप सोचते रह जाते हैं कि अभी तो कोई रिमाइंडर ही नहीं आया!
छुपा नियम 3: पहली किस्त की तारीख की अस्पष्टता। ऋण समझौते में पहली किस्त की सटीक तारीख अक्सर साफ नहीं होती या फिर लाभार्थी उसे नोट नहीं करता। इस वजह से अनजाने में ही ऋण डिफॉल्ट की श्रेणी में आने लगता है। यहाँ सबसे बड़ा जोखिम यह है कि एक बार डिफॉल्ट रिपोर्ट होने के बाद, इसे वापस लेना लगभग नामुमकिन होता है।
| भ्रम (क्या सोचते हैं लोग) | वास्तविकता (हकीकत क्या है) |
|---|---|
| शुरुआत के 6 महीने किस्त माफ है | केवल ब्याज में राहत हो सकती है, मूल चुकौती शुरू हो जाती है |
| बैंक समय पर रिमाइंडर भेजेगा | अक्सर संचार गैप होता है, जिम्मेदारी उधारकर्ता की है |
| एक बार डिफॉल्ट होने पर आसानी से माफी मिल जाएगी | CIBIL रिपोर्ट पर तुरंत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है |
CIBIL स्कोर: अदृश्य पीड़ित – कैसे एक देरी आपका भविष्य बदल देती है
अब बात करते हैं उस चीज की जिसका नुकसान सबसे ज्यादा है – आपका क्रेडिट स्कोर यानी CIBIL स्कोर। सीधी सी बात है, यह एक तीन अंकों का नंबर (300 से 900 के बीच) है जो बताता है कि आप ऋण चुकाने में कितने भरोसेमंद हैं। अच्छा स्कोर (750+) होने पर आपको भविष्य में आसानी से होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन मिल जाता है।
अगर पीएम विश्वकर्मा लोन की पहली किस्त में भी 30 दिन की देरी हो जाए, तो बैंक आपको ‘डिफॉल्टर’ मानकर CIBIL को रिपोर्ट कर सकता है। यह रिपोर्ट आपके CIBIL स्कोर खराब करने के लिए काफी है। एक बार स्कोर गिर गया, तो फिर उसे ऊपर लाने में सालों लग जाते हैं।
दीर्घकालिक परिणाम और भी डरावने हैं। जैसा कि विशेषज्ञ बताते हैं, इस डिफॉल्ट का सबसे गंभीर असर उनके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है, जो लंबे समय (5-7 साल) के लिए खराब हो सकता है। इसका मतलब है कि अगले कई सालों तक कोई भी बड़ा बैंक आपको कर्ज देने से हिचकिचाएगा। आपकी वित्तीय योजनाएं, जैसे नया घर लेना या बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन लेना, सब अटक सकता है।
CIBIL स्कोर पर डिफॉल्ट का प्रभाव
*चार्ट स्कोर में गिरावट और ऋण पात्रता में कमी को दर्शाता है।
ट्रैप से कैसे बचें? विशेषज्ञों की 6 ज़रूरी सलाह
सलाह 1: कागजात पढ़ना सीखें। ऋण मिलने पर जो भी समझौता पत्र (लोन अग्रीमेंट) दिया जाए, उसकी हर लाइन ध्यान से पढ़ें। खासतौर पर चुकौती शुरू होने की तारीख, किस्त की रकम और देरी पर लगने वाले जुर्माने के बारे में।
सलाह 2: तारीख याद रखें, रिमाइंडर लगाएं। पहली किस्त की तारीख को अपने मोबाइल कैलेंडर में नोट कर लें और एक दिन पहले का अलार्म सेट करें। बैंक के रिमाइंडर पर निर्भर न रहें।
सलाह 3: बैंक से सीधा संपर्क बनाए रखें। ऋण मिलने के बाद अपनी बैंक शाखा के ऋण विभाग से एक बार जरूर मिलें। उनसे चुकौती की प्रक्रिया (NEFT, UPI, ऑटो डेबिट) स्पष्ट कर लें।
सलाह 4: अपना CIBIL स्कोर मुफ्त में चेक करते रहें। साल में एक बार AnnualCreditReport.in जैसी RBI मान्यताप्राप्त वेबसाइट से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट मुफ्त में देख सकते हैं। किसी गलत रिपोर्टिंग को तुरंत चुनौती दें।
सलाह 5: जरूरत के हिसाब से लोन लें। अगर आय अनिश्चित या मौसमी है, तो पूरी 2 लाख की बजाय कम राशि का ऋण लें। या फिर, ऋण लेने से पहले ही कुछ बचत करके रखने की कोशिश करें ताकि पहली कुछ किस्तें आसानी से चुका सकें।
सलाह 6: समस्या आने पर खामोश न रहें। अगर किसी महीने किस्त चुकाने में दिक्कत आ रही है, तो तुरंत बैंक प्रबंधक से बात करें और शिकायत दर्ज कराएं। ‘अगले महीने दे देंगे’ वाली सोच से बचें।
अगर फंस गए हैं, तो अभी करें ये 5 काम (डैमेज कंट्रोल)
कदम 1: घबराएं नहीं, स्थिति समझें। सबसे पहले बैंक से संपर्क करके अपनी बकाया राशि, लेट फी और कुल देय रकम का सटीक पता लगाएं। सिर्फ अनुमान पर काम न करें।
कदम 2: चुकौती की नई योजना बनाएं। बैंक से बात करके पूरी बकाया राशि चुकाने की एक नई समयसीमा तय करें। अगर एकमुश्त नहीं दे सकते, तो किश्तों में चुकाने का प्रस्ताव रखें। यह याद रखें कि ऋण चुकाए बिना आपका CIBIL स्कोर सुधरने वाला नहीं है।
कदम 3: CIBIL रिपोर्ट को ‘सेटल्ड’ करवाने का प्रयास करें। पूरा ऋण चुका देने के बाद, बैंक को लिखित में अनुरोध करें कि वे CIBIL को आपका खाता ‘सेटल्ड’ (निपटा हुआ) रिपोर्ट करें। हालाँकि, डिफॉल्ट की हिस्ट्री रिपोर्ट से नहीं हटेगी, लेकिन ‘सेटल्ड’ स्टेटस भविष्य के लेनदारों को एक सकारात्मक संकेत देता है।
कदम 4: धीरे-धीरे स्कोर सुधारें। ऋण चुकाने के बाद, एक सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड (जमानत पर मिलने वाला) लेकर उसका नियमित और पूरा भुगतान करना शुरू करें। यह आपके CIBIL स्कोर खराब होने की क्षतिपूर्ति करने में मदद करेगा। 6-12 महीनों में सुधार दिखने लगेगा।
कदम 5: इस अनुभव को सबक बनाएं। भविष्य में कोई भी सरकारी योजना ऋण या अन्य ऋण लेते समय इस घटना को याद रखें। पूरी तैयारी, जागरूकता और नियमितता के साथ आगे बढ़ें।
FAQs: ‘PM विश्वकर्मा लोन और CIBIL’
Q: क्या PM विश्वकर्मा लोन में वास्तव में शुरुआती महीनों में कोई किस्त नहीं होती?
Q: अगर मेरा CIBIL स्कोर इस लोन से खराब हो गया है, तो क्या इसे ठीक किया जा सकता है?
Q: क्या बैंक बिना सूचना दिए सीधे CIBIL को डिफॉल्ट रिपोर्ट कर सकता है?
Q: क्या इस योजना का लाभ लेने से पहले मुझे अपना CIBIL स्कोर चेक करना चाहिए?
Q: अगर मैंने लोन लिया है और चुकौती में समस्या आ रही है, तो सबसे पहले किससे संपर्क करूं?
अंतिम बात: सशक्तिकरण जागरूकता से आता है, सिर्फ़ ऋण से नहीं
पीएम विश्वकर्मा योजना एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन बिना ज्ञान के कोई भी उपकरण खतरनाक हो सकता है। यह लेख आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि आपकी आँखें खोलने के लिए है। अगर सावधानी बरती जाए, तो इस योजना का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।
याद रखें, ‘सस्ता कर्ज’ की लालच में न पड़ें, ‘जिम्मेदार कर्ज’ की ओर बढ़ें। अपनी चुकौती क्षमता को समझें, कागजात पढ़ें और नियमित रहें। यही इस PM विश्वकर्मा लोन ट्रैप से बचने की कुंजी है।
कृपया इस जानकारी को अपने उन सभी कारीगर साथियों और परिजनों के साथ साझा करें, जो इस योजना का लाभ ले रहे हैं या लेने की सोच रहे हैं। एक साझा जागरूकता ही ऐसे किसी भी सरकारी योजना ऋण के दुष्प्रभावों से बचा सकती है। आपका सुरक्षित और सशक्त भविष्य ही हमारी कामना है।

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes
Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in
the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and
India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial
decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.







