
हाय दोस्तों! कल्पना कीजिए, एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का चेहरा, जो अचानक यह खबर पाकर खुशी से झूम उठा कि उसकी मासिक पेंशन ₹1000 से बढ़कर ₹7500 होने वाली है। यह सपना सच लगता है, है ना? लेकिन, दोस्तों, यहीं पर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है: क्या यह ₹7500 का सपना है, या फिर आपकी जमा पूंजी को लेकर एक कड़वा सच छुपा है? आज का यह लेख सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक गहरा विश्लेषण है। हम प्रस्ताव के पीछे के आंकड़े, EPFO के बयान, और उन दीर्घकालिक जोखिमों को समझेंगे जिनके बारे में शायद ही कोई बात कर रहा है। आप अपनी रिटायरमेंट की सुरक्षा के बारे में एक अहम निर्णय लेने जा रहे हैं, और यह लेख आपको वही जानकारी देगा जो आपको चाहिए।
आज हम EPS 95 पेंशन के इसी प्रस्तावित बदलाव और उससे जुड़े “कड़वे सच” पर चर्चा करेंगे। यह जानना जरूरी है कि कैसे एक बड़ी रकम का वादा, लंबे समय में पूरे पेंशन फंड की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
EPS-95 पेंशन योजना: वह बुनियाद जो आपको जाननी चाहिए
सबसे पहले, आइए बुनियादी बातों को समझ लें। ईपीएस 95, यानी Employees’ Pension Scheme 1995, यह एक स्टैच्यूटरी पेंशन योजना है जो EPFO द्वारा चलाई जाती है। जब आपकी सैलरी से PF कटता है, तो उसका एक हिस्सा इसी भविष्य निधि में जाता है। आसान भाषा में, कर्मचारी अपनी सैलरी का 12% योगदान देता है, जबकि नियोक्ता (Employer) 13.61% देता है। इस 13.61% में से 8.33% हिस्सा सीधे कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के खाते में जमा होता है। यही फंड आपकी रिटायरमेंट के बाद की पेंशन का आधार बनता है।
पेंशन राशि की गणना का फॉर्मूला है: (पेंशन योग्य वेतन X सेवा अवधि) / 70. मान लीजिए, आपका पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 है और आपने 30 साल काम किया है, तो आपकी मासिक पेंशन होगी (15000 X 30) / 70 = ₹6,428.57. हालांकि, एक न्यूनतम और अधिकतम सीमा है। वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, भले ही गणना इससे कम क्यों न आए। अधिकतम सीमा की बात करें तो, पेंशन योग्य वेतन की एक कैप है, जिससे पेंशन की रकम सीमित रहती है।
यह योजना हर उस संगठित क्षेत्र के कर्मचारी के लिए है जिसकी बेसिक सैलरी ₹15,000 प्रति माह से कम या बराबर है। समझ गए न? अब जब बुनियाद स्पष्ट है, तो चलिए नए प्रस्ताव की तरफ बढ़ते हैं।
₹7500 हायर पेंशन का प्रस्ताव 2026: क्या कहते हैं आधिकारिक स्रोत?
अब बात करते हैं उस बड़े प्रस्ताव की, जिसने सबका ध्यान खींचा है। सबसे पहली और जरूरी बात: यह अभी तक एक ‘प्रस्ताव’ ही है, कोई लागू हुआ नियम नहीं। इसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से होती है। EPFO ने कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा करते हुए पेंशन को पाँच गुना तक बढ़ाने का महाप्लान पेश किया है। वहीं, श्रम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
इस प्रस्ताव के मुख्य बिंदु क्या हैं? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान ₹1,000 की न्यूनतम हायर पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की संभावना जताई जा रही है। यह 750% की बढ़ोतरी होगी! साथ ही, एक और प्रस्ताव है जिसके तहत ₹25,000 तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी PF और पेंशन योजना का लाभ उठा सकेंगे, जिससे योजना का दायरा व्यापक होगा। एक बड़ी राहत की बात यह है कि 1 सितंबर 2014 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ मिलने की उम्मीद है।
न्यूनतम मासिक पेंशन: पुराना vs प्रस्तावित
स्रोत: EPFO/श्रम मंत्रालय के प्रस्ताव के आधार पर।
लेकिन दोस्तों, यहाँ एक गहरा सवाल उठता है। क्या इस तरह की भारी बढ़ोतरी का भुगतान करना पेंशन फंड के लिए टिकाऊ होगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि आज का बड़ा वादा, कल को पूरे फंड की स्थिरता के लिए संकट बन जाए? यही है वह “कड़वा सच” जिस पर हमें गौर करना चाहिए।
हायर पेंशन का ‘कड़वा सच’: आपकी जमा पूंजी पर क्या गुजरेगी?
पेंशन फंड का गणित और स्थिरता का संकट
ईपीएस 95 एक ‘डिफाइंड बेनिफिट’ पेंशन योजना है। इसका मतलब है कि आपको जो पेंशन मिलेगी, वह पहले से तय फॉर्मूले के हिसाब से मिलेगी, भले ही फंड का निवेश परिणाम कुछ भी रहा हो। अब सोचिए, अगर न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़कर ₹7,500 हो जाती है, तो हर महीने फंड से निकलने वाली रकम अचानक 7.5 गुना बढ़ जाएगी। यह बढ़ा हुआ खर्च, फंड में आने वाले नए योगदान (नए सदस्यों से) और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न से मेल खा पाएगा या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।
अगर फंड से निकलने वाली रकम, उसमें आने वाली रकम से ज्यादा होने लगे, तो यह फंड की दीर्घकालिक वित्तीय सेहत के लिए खतरा बन सकता है। इसे किसी पोंजी स्कीम की तरह नहीं, बल्कि एक जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) चुनौती के तौर पर देखना चाहिए। सेवानिवृत्त लोगों की संख्या बढ़ रही है, जबकि कार्यरत लोगों का अनुपात घट सकता है। इस स्थिति में फंड पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसका सीधा असर भविष्य में पेंशन भुगतान की नियमितता और समयबद्धता पर पड़ सकता है।
सीधे शब्दों में कहें तो, हायर पेंशन का लाभ तत्काल तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन अगर फंड की जमा पूंजी इस बोझ को नहीं उठा पाई, तो भविष्य में सभी सदस्यों की सेवानिवृत्ति की सुरक्षा पर एक बड़ा जोखिम मंडरा सकता है। यही वह ट्रेड-ऑफ है जिसे समझना बेहद जरूरी है।
क्या खत्म हो सकता है आपका पीएफ कोर्पस? एक भ्रम का निवारण
यहाँ एक आम भ्रम को दूर करना बहुत जरूरी है। बहुत से लोग सोचते हैं कि हायर पेंशन के लिए आवेदन करने पर उनका पूरा PF बैलेंस (Employee’s Contribution) खत्म हो जाएगा। दोस्तों, यह पूरी तरह गलत है। EPS और EPF दो अलग-अलग खाते हैं। आपके PF बैलेंस में आपका खुद का योगदान और Employer का 3.67% हिस्सा जमा होता है। वहीं, पेंशन के लिए Employer का 8.33% हिस्सा अलग से EPS खाते में जाता है।
हायर पेंशन के लिए आवेदन करने पर, Employer के उस 8.33% योगदान का पुनर्निर्धारण होता है, न कि आपके PF कोर्पस का। इसलिए, आपकी निजी पीएफ धन पर सीधा कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, जैसा कि ऊपर बताया, फंड की समग्र स्थिति सभी सदस्यों को प्रभावित करती है, इसलिए जागरूक रहना ही समझदारी है।
पेंशन की योजनाएं सिर्फ EPS-95 तक सीमित नहीं हैं। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी अन्य योजनाओं के बारे में जानना भी जरूरी है…
2026 की राह: आपके लिए व्यावहारिक सलाह और कदम
सक्रिय कर्मचारी (Active Employee) क्या करें?
अगर आप अभी कार्यरत हैं, तो यह चेकलिस्ट आपके लिए है: 1. सेवानिवृत्ति योजना की शुरुआत जानकारी से करें: EPFO के यूएएन पोर्टल पर लॉग इन करके अपनी पेंशन योग्य सेवा और वेतन को वेरिफाई कर लें। 2. हायर पेंशन के लिए आवेदन के नियम (वेतन सीमा, समय सीमा आदि) की ऑफिशियल वेबसाइट से जांच करते रहें। 3. केवल अधिक रकम के लालच में न फंसें। EPFO द्वारा जारी फंड की दीर्घकालिक स्थिरता से जुड़े आंकड़ों और विज्ञप्तियों पर नजर रखें। 4. अपनी रिटायरमेंट की योजना केवल EPS-95 पर निर्भर न रहने दें। अन्य निवेश विकल्पों की भी तलाश करें।
याद रखें, आज की सूचित तैयारी ही कल की सुरक्षित पेंशन लाभ की गारंटी है। प्रस्तावों पर नजर रखें, लेकिन आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें।
सेवानिवृत्त/निकट-सेवानिवृत्त कर्मचारी क्या करें?
अगर आप पहले से रिटायर हैं या जल्द रिटायर होने वाले हैं, तो आपकी प्राथमिकताएं अलग होंगी: 1. खासकर अगर आप 1 सितंबर 2014 के बाद रिटायर हुए हैं, तो आपके लिए विशेष प्रावधानों पर गौर करें। EPFO के ऑफिशियल सर्कुलर देखें। 2. अपना पेंशन भुगतान निर्बाध जारी रखने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण (जीवन प्रमाण पत्र) जमा करने की प्रक्रिया को नियमित रूप से पूरा करते रहें। 3. पेंशन प्राप्त करने वाले बैंक अकाउंट में होने वाले सभी भुगतानों का साफ रिकॉर्ड रखें।
पेंशन जारी रखने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण (Face Scan) देना अब जरूरी है। इसकी पूरी प्रक्रिया समझें…
FAQs: ‘पेंशन राशि’
Q: क्या ₹7500 मिनिमम पेंशन 2026 में लागू हो जाएगी?
Q: हायर पेंशन के लिए आवेदन करने पर मेरा पूरा PF बैलेंस खत्म हो जाएगा?
Q: अगर मैंने पहले हायर पेंशन के लिए आवेदन नहीं किया था, तो क्या अब कर सकता हूं?
Q: EPS पेंशन और कंपनी पेंशन में क्या अंतर है?
Q: पेंशन न मिलने या कम मिलने की स्थिति में मैं कहां शिकायत कर सकता हूं?
निष्कर्ष: सूचित निर्णय ही सबसे बड़ा लाभ है
तो दोस्तों, आइए मुख्य बातों को फिर से याद कर लें। EPS 95 पेंशन के तहत ₹7500 की न्यूनतम पेंशन का प्रस्ताव निश्चित रूप से एक बड़ी राहत और खुशखबरी की तरह लगता है। लेकिन, इसके साथ ही पेंशन फंड की दीर्घकालिक स्थिरता का जोखिम भी जुड़ा हुआ है। हमने समझा कि कैसे यह प्रस्ताव फंड के गणित को बदल सकता है और भविष्य के भुगतानों को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, हमने पीएफ बैलेंस को लेकर फैले भ्रम को भी दूर किया।
अंत में, सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आप भावनाओं या अफवाहों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी सूचना और अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति के आधार पर ही कोई निर्णय लें। EPFO की आधिकारिक वेबसाइट और गजट नोटिफिकेशन पर नजर बनाए रखें। एक सूचित नागरिक और सदस्य के रूप में सक्रिय रहें। आपकी रिटायरमेंट की सुरक्षा सबसे ज्यादा मायने रखती है।

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes
Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in
the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and
India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial
decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.







