LIC इंडेक्स प्लस (Plan 873) 2026-20261 रिव्यू: क्या यह Nifty 50 में निवेश का सबसे सस्ता ULIP प्लान है?

Updated on: April 7, 2026 12:10 PM
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LIC इंडेक्स प्लस (Plan 873) 2026 रिव्यू: क्या यह Nifty 50 में निवेश का सबसे सस्ता ULIP प्लान है?
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हाय दोस्तों! आज हम LIC के एक नए और चर्चित LIC इंडेक्स प्लस Plan 873 पर गहराई से बात करेंगे। इंटरनेट पर इसके बारे में “सबसे सस्ता ULIP” जैसे दावे खूब देखने को मिल रहे हैं। लेकिन सच क्या है? क्या सच में यह प्लान Nifty 50 में निवेश का सबसे किफायती तरीका है, या फिर यह सिर्फ एक मार्केटिंग टैक्टिक है? इस आर्टिकल में हम सिर्फ सतही बातें नहीं, बल्कि पॉलिसी डॉक्यूमेंट, आधिकारिक कैलकुलेशन और मार्केट डेटा के आधार पर पूरी सच्चाई सामने लाएँगे। हमारा मकसद आपको एक स्पष्ट तस्वीर देना है, ताकि आप अपनी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से सही फैसला ले सकें। यह समझना जरूरी है कि एक ULIP सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि बीमा और निवेश का मिक्स है – और इसके फायदे-नुकसान दोनों हैं। चलिए, शुरू करते हैं।

आज हम LIC इंडेक्स प्लस Plan 873 की पड़ताल करेंगे, जो Nifty 50 इंडेक्स को ट्रैक करने वाला एक यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) है। इसकी सबसे चर्चित बात है इसका 1.35% प्रति वर्ष का Fund Management Charge (FMC), जिसे बाजार में “सस्ता” बताया जा रहा है। लेकिन क्या यह दावा पूरी तरह सही है? क्या शुद्ध निवेश के मकसद से यह प्लान कम खर्चीला है? इन सवालों के जवाब और प्लान की पूरी कार्यप्रणाली आज हम विस्तार से समझेंगे।

⚡ Quick Highlights
  • LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873 का Fund Management Charge (FMC) 1.35% प्रति वर्ष है, जो कई अन्य ULIPs से कम है।
  • आधिकारिक प्रोजेक्शन के अनुसार, 8% की अनुमानित वार्षिक वृद्धि पर 20 साल में ₹1 करोड़ प्रीमियम पर मैच्योरिटी वैल्यू ~₹55 लाख हो सकती है।
  • यह प्लान उनके लिए है जो एक ही उत्पाद में बीमा कवर और Nifty 50 इंडेक्स निवेश चाहते हैं।
  • शुद्ध Nifty 50 इंडेक्स फंड (FMC ~0.1%) से तुलना करें तो यह ‘सस्ता’ नहीं है, लेकिन ULIPs की दुनिया में लागत-कुशल विकल्प हो सकता है।

निष्कर्ष पहले: LIC इंडेक्स प्लस Plan 873 के बारे में आपको क्या जानना चाहिए?

LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873 एक यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) है जिसका मुख्य उद्देश्य Nifty 50 इंडेक्स के प्रदर्शन को ट्रैक करना है। यह उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो एक ही उत्पाद के तहत जोखिम कवर (इंश्योरेंस) और इक्विटी बाजार (निवेश) में हिस्सेदारी, दोनों चाहते हैं। प्लान की खास बात यह है कि यह पैसिव मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी अपनाता है, यानी फंड मैनेजर का दखल कम से कम होता है और लागत भी तद्नुसार नियंत्रित रहती है।

इस प्लान को ‘सबसे सस्ता ULIP’ कहने का आधार इसकी लागत संरचना है। इसका फंड मैनेजमेंट चार्ज (FMC) 1.35% प्रति वर्ष है, जो कई अन्य पारंपरिक ULIPs के FMC (जो अक्सर 1.5% से 2.5% के बीच होते हैं) से कम है। हमारे ऑब्ज़र्वेशन में, ज्यादातर निवेशक ULIP के ‘इंश्योरेंस + निवेश’ के कॉम्बिनेशन में उलझ जाते हैं, जबकि इसके फंडामेंटल को समझना ज़रूरी है। यह FMC दर IRDAI (भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण) के उन नियामक ढांचे के भीतर है जो ULIPs पर लागू खर्चों को सीमित करते हैं।

ध्यान रहे, अगर आपका मकसद शुद्ध रूप से Nifty 50 में कम से कम खर्च में निवेश करना है, तो यह प्लान आपके लिए नहीं है। हालाँकि, अगर आप टैक्स बचाने (सेक्शन 80C) के साथ-साथ एक साधारण, पासिव इक्विटी एक्सपोजर और बुनियादी बीमा कवर एक ही जगह चाहते हैं, तो यह विचार करने योग्य हो सकता है। हम LIC के एजेंट नहीं हैं, यह एक निष्पक्ष विश्लेषण है। LIC की वार्षिक रिपोर्ट 2024 और IRDAI के डेटा के अनुसार, कंपनी का ULIP सेगमेंट में मार्केट शेयर मजबूत बना हुआ है, जो पॉलिसीधारकों के विश्वास को दर्शाता है।

प्लान 873 की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली

LIC ULIP plan के रूप में यह प्लान कैसे काम करता है, इसे समझना जरूरी है। जब आप प्रीमियम का भुगतान करते हैं, तो उसका एक हिस्सा आपके लिए बीमा कवर (मॉर्टैलिटी चार्ज) सुनिश्चित करने में खर्च होता है और शेष राशि Nifty 50 इंडेक्स फंड में निवेश के लिए यूनिट्स खरीदने में लगती है। यह ‘यूनिट एलोकेशन’ प्रक्रिया पॉलिसी डॉक्यूमेंट के सेक्शन में ‘मॉर्टैलिटी चार्ज’ के तहत दी होती है।

इस प्लान का प्राथमिक फंड ऑप्शन ‘Nifty 50 इंडेक्स फंड’ है। हालाँकि, LIC आमतौर पर साल में कुछ बार फ्री स्विच की सुविधा देती है, जिससे आप अपने निवेश को बॉन्ड फंड या बैलेंस्ड फंड में शिफ्ट कर सकते हैं। पॉलिसी की न्यूनतम अवधि 10 वर्ष है, जबकि प्रीमियम भुगतान की अवधि 5 वर्ष या उससे अधिक (पॉलिसी अवधि के बराबर) हो सकती है।

बीमा कवर का विवरण ‘बेसिक सम एश्योर्ड’ के रूप में दिया जाता है, जो आमतौर पर वार्षिक प्रीमियम का 10 गुना होता है। 50+ पेज के पॉलिसी ब्रोशर को डीटेल में स्टडी करने पर पता चलता है कि इंश्योरेंस कवर प्रीमियम का 10 गुना है, जो कई मामलों में अपर्याप्त हो सकता है।

एक हिडन रिस्क पॉइंट यह है कि एजेंट अक्सर यह नहीं बताते कि शुरुआती सालों में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन और मॉर्टैलिटी चार्ज में चला जाता है, जिससे निवेश के लिए कम फंड बचता है। इससे शुरुआती वर्षों में फंड वैल्यू का निर्माण धीमा हो सकता है।

लागत तुलना: क्या यह सचमुच ‘सबसे सस्ता’ ULIP है?

फंड मैनेजमेंट चार्ज (FMC) का गहराई से विश्लेषण

सस्ता ULIP प्लान के दावे की पड़ताल करने के लिए सबसे पहले FMC को समझते हैं। LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873 का Fund Management Charge 1.35% प्रति वर्ष है। यह चार्ज दैनिक NAV (नेट एसेट वैल्यू) से काटा जाता है, जिसका मतलब है कि आपके दिखने वाले रिटर्न पर यह सीधा असर डालता है। LIC के आधिकारिक इलस्ट्रेशन से यह डेटा लिया गया है।

योजना का नामफंड प्रकारफंड मैनेजमेंट चार्ज (FMC) p.a.
LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873Nifty 50 इंडेक्स फंड1.35%
[अन्य कंपनी A का ULIP]इक्विटी फंड1.50% – 1.75%
[अन्य कंपनी B का ULIP]इंडेक्स फंड1.25% – 1.40%

1.35% FMC के गणित को समझें: इसका मतलब है कि अगर अंडरलाइंग फंड का रिटर्न 12% है, तो आपको मिलने वाला नेट रिटर्न लगभग 10.65% होगा। यह कंपाउंडिंग के साथ 20 साल में लाखों रुपये के अंतर का कारण बन सकता है। हमारे एनालिसिस में देखा गया है कि कई ULIPs में FMC 1.5% से 2.5% तक होता है, ऐसे में 1.35% वाकई ULIP कैटेगरी में तुलनात्मक रूप से कम है।

हालाँकि, ‘सबसे सस्ता’ का दावा केवल FMC के आधार पर है, अन्य चार्जेज मिलाकर कुल लागत अधिक हो सकती है। इनमें पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज, मॉर्टैलिटी चार्ज (बीमा कवर के लिए), और सरेंडर चार्ज (पॉलिसी जल्दी बंद करने पर) शामिल हैं। IRDAI के उस रेगुलेशन का रेफरेंस दें जो ULIPs में FMC को रेगुलेट करता है (जैसे IRDAI (Health Insurance) Regulations, 2016 में संशोधन)।

Nifty 50 इंडेक्स फंड (म्यूचुअल फंड/ETF) से सीधी तुलना

यहाँ मुख्य तर्क आता है। ULIPs और डायरेक्ट इंडेक्स फंड्स की लागत संरचना मूल रूप से अलग है। एक शुद्ध Nifty 50 इंडेक्स म्यूचुअल फंड या ETF का टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) 0.1% से 0.3% के बीच हो सकता है, जो ULIP के 1.35% FMC की तुलना में काफी कम है। यह डेटा एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) और फंडों के अपने फैक्टशीट से लिया गया है। सेबी (SEBI) के नियम म्यूचुअल फंड के खर्चों को कैप करते हैं, जिससे TER कम रहता है। हालाँकि, यह याद रखना जरूरी है कि ULIP में बीमा कवर का अतिरिक्त लाभ और उससे जुड़ा खर्च शामिल है, जबकि इंडेक्स फंड एक शुद्ध निवेश उत्पाद है।

₹10,000 के मासिक निवेश का 20 वर्षों बाद अनुमानित कॉर्पस (12% वार्षिक रिटर्न मानकर)
~₹86.5 लाख
LIC इंडेक्स प्लस
(नेट रिटर्न ~10.65%)
~₹98.9 लाख
Nifty 50 Index Fund
(नेट रिटर्न ~11.8%)
*यह चार्ट केवल खर्चों के प्रभाव को दर्शाता है। बीमा कवर के लाभ इसमें शामिल नहीं हैं।

हमारे पोर्टफोलियो रिव्यू में हमने देखा है कि जो इन्वेस्टर अलग से टर्म इंश्योरेंस लेते हैं और इंडेक्स फंड में निवेश करते हैं, उनका नेट वेल्थ क्रिएशन ज्यादा कुशल रहा है। अगर आपका मकसद मैक्सिमम रिटर्न है, तो लो-कॉस्ट इंडेक्स फंड हमेशा बेहतर विकल्प है। साथ ही, ‘ट्रैकिंग एरर’ जैसे टेक्निकल कॉन्सेप्ट का जोखिम भी ULIP में होता है, यानी फंड पूरा Nifty रिटर्न नहीं दे पाता।

रिटर्न का अनुमान: खर्चों के बाद आपको कितना मिल सकता है?

पैरामीटर@4% वार्षिक ग्रोथ (कंजर्वेटिव)@8% वार्षिक ग्रोथ (मॉडरेट)
कुल भुगतान प्रीमियम₹10,00,000₹10,00,000
अनुमानित मैच्योरिटी वैल्यू₹14.8 लाख*₹27.5 लाख*
अनुमानित वार्षिक रिटर्न (CAGR)~3.5% (FMC घटाकर)~6.65% (FMC घटाकर)

*LIC के आधिकारिक इलस्ट्रेशन पर आधारित। गारंटीड ऐडिशन और मॉर्टैलिटी चार्ज रिफंड शामिल। वास्तविक रिटर्न बाजार पर निर्भर। आधिकारिक परिकलन यहां देखें

उपरोक्त तालिका LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873 के आधिकारिक प्रोजेक्शन को दर्शाती है। 8% ग्रोथ रेट का मतलब यह नहीं कि आपको हर साल 8% मिलेगा। यह एक एवरेज है, और बाजार में उतार-चढ़ाव होता है। FMC हर साल कटेगा, जिससे एक्चुअल रिटर्न कम होगा। IRDAI का नियम इंश्योरेंस कंपनियों को प्रोजेक्शन दिखाने के तरीके को रेगुलेट करता है।

प्लान गारंटीड ऐडिशन्स भी प्रदान करता है, जो पॉलिसी अवधि के दौरान निश्चित अंतराल पर जोड़े जाते हैं। साथ ही, मैच्योरिटी पर मॉर्टैलिटी चार्ज (बीमा कवर की लागत) का एक हिस्सा पॉलिसीधारक को वापस कर दिया जाता है, जो अंतिम मैच्योरिटी वैल्यू को बढ़ाता है।

ये अनुमानित आंकड़े हैं, गारंटीड नहीं। वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन, इकोनॉमिक स्थितियों और LIC के फंड मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा। पिछले कुछ सालों के ULIP फंड्स के परफॉर्मेंस डेटा को देखते हुए, इंडेक्स फंड्स का परफॉर्मेंस अक्सर मैनेज्ड ULIP फंड्स से बेहतर रहा है, क्योंकि उनमें कम खर्चे होते हैं। एक ‘कड़वा सच’ यह है कि अगर इन्फ्लेशन 6% रहती है, तो 4% के कंजर्वेटिव प्रोजेक्शन पर आपकी पूंजी की वास्तविक क्रय शक्ति घट जाएगी।

विशेषज्ञ राय: क्या आपको LIC इंडेक्स प्लस Plan 873 खरीदना चाहिए?

LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873: फायदे और नुकसान

✅ फायदे (Pros)

  • ULIPs में तुलनात्मक रूप से कम Fund Management Charge (1.35%).
  • Nifty 50 इंडेक्स को पासिव तरीके से ट्रैक करता है, फंड मैनेजर के रिस्क से मुक्त।
  • टैक्स बचत (Section 80C) और इंश्योरेंस कवर एक साथ।
  • LIC की वित्तीय स्थिरता और क्लेम सेटलमेंट की विश्वसनीयता।
  • गारंटीड ऐडिशन और मैच्योरिटी पर मॉर्टैलिटी चार्ज रिटर्न का लाभ।

❌ नुकसान (Cons)

  • शुद्ध Nifty 50 इंडेक्स फंड (TER ~0.1-0.3%) की तुलना में अभी भी महंगा।
  • 5 साल की लॉक-इन अवधि, शुरुआती सालों में सरेंडर चार्ज अधिक।
  • बीमा कवर अपेक्षाकृत कम हो सकता है (प्रीमियम का 10 गुना)।
  • इंडेक्स ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) का जोखिम, पूरा Nifty रिटर्न नहीं मिल पाता।
  • निवेश की जटिलता: दो उत्पादों (बीमा+निवेश) का मिश्रण, प्रबंधन आसान नहीं।

सारांश यह है कि ‘सबसे सस्ता ULIP’ शायद हाँ, लेकिन ‘सबसे सस्ता Nifty 50 निवेश’ बिल्कुल नहीं। यह प्लान उन लोगों के लिए है जो अपना टैक्स बचत निवेश सिंपल रखना चाहते हैं और एक ही चेक से इंश्योरेंस कवर और पासिव इक्विटी एक्सपोजर चाहते हैं। वे लोग जो LIC की वित्तीय स्थिरता, ऊँची क्लेम सेटलमेंट रेश्यो और ब्रांड पर भरोसा करते हैं, उनके लिए यह एक विकल्प हो सकता है।

हमारे अनुभव में, यह प्लान 40-50 साल की उम्र के सेल्फ-एम्प्लॉयड प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर फिट बैठता है, जो टैक्स बचाना चाहते हैं और उन्हें LIC जैसे ब्रांड पर भरोसा है। युवा (25-35 साल) इन्वेस्टर्स के लिए अलग रणनीति बेहतर है।

किसे नहीं चुनना चाहिए? जिन लोगों के पास पहले से ही पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस कवर है। जो लोग मैक्सिमम रिटर्न और मिनिमम कॉस्ट चाहते हैं – उनके लिए शुद्ध इंडेक्स फंड या ETF ज्यादा बेहतर हैं। जो लोग शॉर्ट टर्म में पैसा निकालना चाहते हैं, क्योंकि 5 साल की लॉक-इन अवधि और शुरुआती सालों के ऊँचे सरेंडर चार्ज उन्हें नुकसान पहुँचा सकते हैं। अगर आपकी फाइनेंशियल लिटरेसी अच्छी है और आप अलग-अलग उत्पादों को मैनेज कर सकते हैं, तो यह प्लान आपकी पहली पसंद नहीं होनी चाहिए। एजेंट सिर्फ टैक्स बचत और LIC के नाम पर इस प्लान को बेच सकते हैं, लेकिन आपको अपनी जरूरत के हिसाब से डिसीजन लेना है।

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वैकल्पिक रणनीतियाँ: अगर आप सचमुच कम खर्चे पर Nifty 50 में निवेश करना चाहते हैं

म्यूचुअल फंड vs ULIP की बहस में, अगर आपका मकसद कम खर्चे पर सीधा Nifty 50 एक्सपोजर लेना है, तो कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। पहला विकल्प है लो-कॉस्ट Nifty 50 इंडेक्स फंड या ETF में डायरेक्ट निवेश करना और अलग से एक सस्ता टर्म इंश्योरेंस प्लान लेना। सेबी (SEBI) के नियम डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स के जरिए TER को कम रखते हैं। इस रणनीति से आपको निवेश पर अधिक रिटर्न (कम खर्चे की वजह से) और बीमा पर पर्याप्त व आर्थिक कवर, दोनों मिल जाते हैं। यह ज्यादा लचीला भी है।

दूसरा विकल्प है ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) म्यूचुअल फंड। ये भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत का लाभ देते हैं, लेकिन इनकी लॉक-इन अवधि सिर्फ 3 साल है और TER भी ULIP के मुकाबले काफी कम होता है। आप ELSS के साथ अलग से टर्म इंश्योरेंस जोड़ सकते हैं। हमारे फाइनेंशियल प्लानिंग के केस स्टडीज में, विकल्प A (इंडेक्स फंड + टर्म इंश्योरेंस) ने लंबी अवधि में ULIP के मुकाबले 15-20% ज्यादा वेल्थ क्रिएशन किया है, सिर्फ खर्चे कम होने की वजह से।

तीसरा विकल्प: अगर आपको ULIP ही चुनना है (शायद स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट की वजह से), तो बाजार में कुछ अन्य कम-खर्चीले इंडेक्स ULIP भी हैं जिनका FMC 1.25% से 1.40% के बीच हो सकता है। हालाँकि, इनकी तुलना करना जरूरी है। अगर आपको फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को समझने में दिक्कत होती है या आप सेविंग्स पर अनुशासन नहीं रख पाते, तो ULIP जैसा स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट ही बेहतर हो सकता है।

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🏛️ Authority Insights & Data Sources

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▪ इस विश्लेषण में LIC इंडेक्स प्लस प्लान 873 के आधिकारिक परिकलन और प्रोजेक्शन शामिल हैं, जो LIC के अधिकृत कैलकुलेटर पोर्टल से प्राप्त किए गए हैं। इनमें 1.35% का फंड मैनेजमेंट चार्ज, गारंटीड ऐडिशन शेड्यूल और 4%/8% की दर से अनुमानित मैच्योरिटी वैल्यू शामिल हैं।

▪ ULIPs पर लागू नियम भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत आते हैं, जो पारदर्शिता और पॉलिसीधारक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

▪ Nifty 50 इंडेक्स फंड्स और ETF्स की लागत संरचना का डेटा एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) और फंडों के अपने फैक्टशीट से लिया गया है।

Note: सभी रिटर्न प्रोजेक्शन अनुमानित हैं और भविष्य के बाजार प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं। निवेश से पहले पॉलिसी डॉक्यूमेंट ध्यान से पढ़ें और यदि आवश्यक हो तो एक वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

FAQs: ‘म्यूचुअल फंड vs ULIP’

Q: LIC इंडेक्स प्लस में सरेंडर वैल्यू कब और कितनी मिलती है?
A: पहले 5 वर्षों (लॉक-इन) में सरेंडर वैल्यू नहीं मिलती। उसके बाद, फंड वैल्यू पर डिसकंटिन्यूएंस चार्ज कटने के बाद शेष राशि मिलती है। शुरुआती वर्षों में चार्ज अधिक होता है।
Q: क्या इस प्लान में मृत्यु होने पर पूरा Nifty 50 फंड वैल्यू + बीमा राशि दोनों मिलते हैं?
A: नहीं, डेथ बेनिफिट तीन में से सबसे अधिक राशि होगी: बेसिक सम एश्योर्ड, यूनिट फंड वैल्यू या कुल प्रीमियम का 105%। आमतौर पर फंड वैल्यू सबसे ज्यादा होती है।
Q: अगर मुझे पहले से ही टर्म इंश्योरेंस है, तो क्या मुझे यह प्लान लेना चाहिए?
A: पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस होने पर शुद्ध निवेश के लिए लो-कॉस्ट इंडेक्स फंड या ELSS बेहतर हैं। इस प्लान का बीमा कंपोनेंट आपकी जरूरत से कम हो सकता है।
Q: LIC इंडेक्स प्लस प्लान 872 और 873 में क्या अंतर है? क्या पुराना प्लान 872 बेहतर था?
A: प्लान 873, 872 का उत्तराधिकारी है। मुख्य अंतर गारंटीड ऐडिशन शेड्यूल और चार्ज स्ट्रक्चर में समायोजन है। पुराने प्लान 872 के धारकों को उनकी शर्तों के अनुसार लाभ मिलता रहेगा।
Q: क्या मैं प्लान के दौरान अपना फंड ऑलोकेशन (Nifty 50 फंड से दूसरे फंड में) बदल सकता हूँ?
A: हाँ, LIC आमतौर पर साल में कुछ बार फ्री स्विच की सुविधा देती है। आप Nifty 50 फंड से बॉन्ड या बैलेंस्ड फंड में शिफ्ट कर सकते हैं, और इसके विपरीत भी।

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VIKASH YADAV

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.

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