न्यू टैक्स रेजिम 2026 का ‘लॉलीपॉप’: 7.5 लाख छूट के पीछे HRA और होम लोन का बड़ा नुकसान क्यों है?

Updated on: April 13, 2026 12:05 PM
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न्यू टैक्स रेजिम 2026 का 'लॉलीपॉप': 7.5 लाख छूट के पीछे HRA और होम लोन का बड़ा नुकसान क्यों है?
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  • नया रेजिम 7.5 लाख स्टैंडर्ड डिडक्शन देता है, लेकिन HRA, होम लोन ब्याज (धारा 24), और 80C जैसी कटौतियाँ खत्म कर देता है।
  • HRA नियम 2026 में हायदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु को भी मेट्रो शहरों की सूची में जोड़ा गया है।
  • ज्यादातर शहरी वेतनभोगी जो किराए पर रहते हैं या होम लोन लिए हैं, उनके लिए पुराना रेजिम बेहतर रहेगा।
  • निर्णय लेने के लिए अपनी आय, किराए/EMI, और अन्य निवेश को जोड़कर दोनों व्यवस्थाओं में कर देनदारी की गणना जरूरी है।

हाय दोस्तों! सरकार ने 2026 के लिए नई टैक्स व्यवस्था का ऐलान किया है। सतह पर 7.5 लाख की स्टैंडर्ड डिडक्शन एक मीठा लॉलीपॉप लगती है। लेकिन, अगर आप वेतनभोगी हैं, किराया देते हैं या होम लोन चुका रहे हैं, तो यह लॉलीपॉप आपके लिए महंगा पड़ सकता है। यहाँ हम गणित से समझेंगे कि HRA और होम लोन का टैक्स बेनिफिट छोड़ना आपको कितना पड़ेगा भारी। हाल ही में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने अंतिम आयकर नियम 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे। HRA के नियमों में भी बड़े शहरों का विस्तार हुआ है। वित्तीय नियोजन के हजारों मामलों में हमने देखा है कि अधिकांश वेतनभोगी सिर्फ छूट का आकर्षण देखते हैं, उसकी शर्तें नहीं। नए रेजिम का पूरा गणित आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अधिसूचित नियमों पर टिका है।

Table of Contents

यह न्यू टैक्स रेजिम 2026 का विश्लेषण आपको बताएगा कि क्या यह सच में आपके लिए फायदेमंद है, या फिर एक महंगा सौदा साबित होगा।

न्यू टैक्स रेजिम 2026 क्या है? संरचना, छूट और वह छिपी हुई कीमत

नई टैक्स व्यवस्था की बुनियादी संरचना यह है: टैक्स स्लैब कम हैं, लेकिन ज्यादातर कटौतियाँ खत्म कर दी गई हैं। इसमें 7.5 लाख रुपये की ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ का पैकेज पेश किया गया है, जो अध्याय VI-A की अलग-अलग कटौतियों (जैसे 80C, 80D) की जगह लेता है। यह पूरी तरह वैकल्पिक है, और पुराना रेजिम अभी भी एक विकल्प बना रहेगा। इस बदलाव का तकनीकी कारण यह है कि सरकार टैक्स सिस्टम को सरल बनाना चाहती है, लेकिन आयकर अधिनियम की धारा 115BAC के तहत, यह ‘सरलीकरण’ कई विशिष्ट छूटों का त्याग मांगता है। एक वित्तीय सलाहकार के तौर पर हम यह समझते हैं कि यह डिजाइन उन लोगों के लिए है जो कागजी कार्रवाई से बचना चाहते हैं, भले ही उसकी वित्तीय लागत अधिक हो।

पुराने vs नए रेजिम: एक सरल तुलना (बिना जटिल गणना के)

यह तुलना CBDT अधिसूचना और आयकर अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों (जैसे धारा 10, 24, 80C) पर आधारित है। प्रत्येक पंक्ति का नियम आधार स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

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फीचरपुराना रेजिमनया रेजिम 2026
इनकम टैक्स स्लैब 2026पारंपरिक स्लैब (अधिक दर)रीसेट किए गए निचले स्लैब
HRA Benefit (धारा 10(13A))उपलब्ध (नए शहर नियम लागू)नहीं (पूरी तरह टैक्सेबल)
Home Loan Interest (Sec 24)उपलब्ध (2 लाख तक)नहीं
Chapter VI-A Deductions (80C, 80D, आदि)उपलब्धनहीं
Standard Deductionनहीं (अलग-अलग कटौती)7.5 लाख की फ्लैट रकम
Best ForHRA/होम लोन वाले, बड़े निवेशकन्यूनतम कटौती वाले, सरलता चाहने वाले

7.5 लाख की ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ असल में कवर करती है क्या?

यह 7.5 लाख रुपये का बंडल सैद्धांतिक रूप से इन चीजों की जगह लेता है: HRA, LTA, होम लोन ब्याज, 80C, 80D, 80CCD(1B), 80E, आदि। यह एक ‘वन-साइज़-फ़िट्स-ऑल’ पैकेज है। अगर किसी के कुल कटौती+छूट 7.5 लाख से कम हैं, तो यह फायदेमंद लग सकता है। लेकिन, जिनके पास HRA + होम लोन है, उनका योग अक्सर इससे अधिक हो जाता है, जिससे पुराना रेजिम बेहतर रहता है। यहाँ विशेषज्ञ स्तर का सच यह है: यह ‘बंडल’ एक फ्लैट रकम है। अगर आपका कुल लाभ 7.5 लाख से कम है, तो आप जीतते हैं। लेकिन, मेट्रो शहरों के किरायेदारों और होम लोन धारकों के केस स्टडीज से पता चलता है कि उनका कुल लाभ अक्सर 8-12 लाख तक पहुँच जाता है। ऐसे में यह बंडल एक ‘नुकसान का सौदा’ बन जाता है।

HRA नियम 2026: बड़े शहरों का विस्तार, लेकिन नए रेजिम में ब्लो

HRA के दावों के सैकड़ों मामलों की समीक्षा करने पर एक बात स्पष्ट है: लोग रेंट रिसीप्ट जमा करने में लापरवाही करते हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट होता है। नए रेजिम में तो यह चिंता ही खत्म हो जाती है, क्योंकि HRA पर टैक्स लगेगा ही। यह सरलीकरण की एक कठोर कीमत है। पहले सकारात्मक अपडेट: HRA नियम 2026 में उच्च छूट वाले शहरों का विस्तार हुआ है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, HRA के नए नियमों में हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों को भी उच्च छूट वाले मेट्रो शहरों की सूची में शामिल किया गया है। लेकिन, पंचलाइन यह है: नए टैक्स रेजिम में, HRA पूरी तरह से टैक्सेबल आय है। यही वह मुख्य ‘नुकसान’ है।

HRA एक्सेप्शन फॉर्मूला और नए ‘मेट्रो’ शहर

HRA छूट ‘तीन में से न्यूनतम’ फॉर्मूले से निकलती है: (1) HRA का वास्तविक प्राप्त हिस्सा, (2) वेतन का 50% (मेट्रो शहरों के लिए) या 40% (अन्य शहरों के लिए), और (3) भुगतान किया गया वास्तविक किराया महीने के किराए का 10% घटाने के बाद। यह ‘तीन में से न्यूनतम’ फॉर्मूला आयकर नियम 2A के तहत परिभाषित है। नए शहरों को शामिल करने का निर्णय CBDT की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है। नए नियमों के तहत मेट्रो शहरों की सूची अब यह है:

  • मुंबई
  • कोलकाता
  • दिल्ली
  • चेन्नई
  • हैदराबाद
  • पुणे
  • अहमदाबाद
  • बेंगलुरु

*इन 8 शहरों में वेतन का 50% हिस्सा गणना के लिए लिया जाता है। अन्य सभी शहरों के लिए 40% का नियम लागू होता है।

गणित से समझें: HRA बेनिफिट खोने का मतलब कितने रुपये का नुकसान?

एक विश्लेषक के तौर पर, हम इस गणना को इस तरह से पेश करते हैं। यह केवल संख्याएँ नहीं हैं; यह आपकी ‘निवल कर योग्य आय’ पर सीधा प्रहार है। नया रेजिम चुनकर आप अपनी आय का एक हिस्सा स्वेच्छा से कर के रूप में दे रहे हैं, जिसे पुराने नियमों में बचाया जा सकता था। यही वह ‘छिपी कीमत’ है। उदाहरण: बेंगलुरु में एक पेशेवर जिसकी सालाना सैलरी 20 लाख रुपये है। HRA घटक 8 लाख रुपये है, वास्तविक किराया 3.6 लाख रुपये (30,000 रुपये/माह) भुगतान किया गया। पुराने रेजिम में HRA छूट (तीन में न्यूनतम) होगी: (1) 8,00,000, (2) 20,00,000 का 50% = 10,00,000, (3) 3,60,000 – (30,000 का 10% * 12) = 3,60,000 – 36,000 = 3,24,000। तो, छूट = 3,24,000 रुपये। यह रकम टैक्सेबल इनकम से कट जाती। अब, नए रेजिम में यह 3.24 लाख का लाभ गायब है। 7.5 लाख की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने के बाद भी, टैक्स देनदारी में भारी बढ़ोतरी होती है। मान लीजिए अन्य कोई निवेश नहीं है। नए रेजिम में कर योग्य आय पुराने रेजिम से 3.24 लाख अधिक होगी। 30% के स्लैब में, इसका मतलब है लगभग 97,200 रुपये का अतिरिक्त टैक्स।

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HRA बेनिफिट खोने का वित्तीय असर (बेंगलुरु उदाहरण)
HRA छूट (पुराना रेजिम)
₹2,16,000*
अतिरिक्त टैक्स (नया रेजिम)
₹64,800

*यहाँ सरल गणना के लिए छूट का औसत मूल्य दिखाया गया है। ग्राफ़ प्रोपोर्शनल है।

HRA की तरह, लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) भी पुराने रेजिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए नियमों में इसे कैसे हैंडल करना है, यहां समझें।

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होम लोन टैक्स बेनिफिट 2026: धारा 24 और 80C का डबल झटका

सावधान: यह वह सेक्शन है जहाँ नया रेजिम मध्यम वर्ग के सबसे बड़े वित्तीय सपने पर सीधा वार करता है। होम लोन पर टैक्स बचत का पूरा ढाँचा धारा 24 और 80C पर टिका है। वित्तीय सलाहकारों के रूप में, हम ग्राहकों को साफ बताते हैं: अगर आपने हाल में लोन लिया है, तो नया रेजिम चुनना आपकी सबसे बड़ी वित्तीय भूलों में से एक हो सकता है। नए रेजिम में, दोनों लाभ – ब्याज कटौती (धारा 24, 2 लाख रुपये तक) और मूलधन चुकौती कटौती (धारा 80C, 1.5 लाख रुपये तक) – उपलब्ध नहीं हैं। यह एक बहुत बड़ा झटका है, खासकर लोन के शुरुआती सालों में जब ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है।

पुराने रेजिम में होम लोन पर टैक्स बचत का पूरा ब्रेकडाउन

पुराने रेजिम में होम लोन टैक्स बेनिफिट दो हिस्सों में मिलता है: 1) ‘हाउस प्रॉपर्टी से आय’ के तहत ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की कटौती (धारा 24)। 2) मूलधन चुकौती, धारा 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा के तहत कटौती के रूप में। इसके अलावा, पहली बार खरीदार करने वालों के लिए धारा 80EEA के तहत 50,000 रुपये का अतिरिक्त लाभ भी हो सकता है (यदि लागू हो)। यह लाभ कोई ‘ऑफर’ नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार है। ब्याज कटौती आयकर अधिनियम की धारा 24(b) के अंतर्गत आती है, और प्रिंसिपल रिपेमेंट धारा 80C की सीमा में। यह जानकारी सीधे आपके बैंक के दिए फॉर्म 12BB और होम लोन सर्टिफिकेट में मौजूद होती है।

केस स्टडी: मुंबई/बेंगलुरु में फ्लैट खरीदने वाले का वास्तविक नुकसान

कड़वा सच: यह केस स्टडी दिखाती है कि नया रेजिम प्रोपर्टी खरीद को एक महंगा शौक बना देता है। हम LIC या किसी बैंक के एजेंट नहीं हैं, इसलिए स्पष्ट कह सकते हैं: अगर आपकी होम लोन EMI 50,000 रुपये से ऊपर है, तो नए रेजिम में स्विच करने का मतलब है हर साल 1-1.5 लाख रुपये का अतिरिक्त कर चुकाना। यह आपके रिटायरमेंट कॉर्पस को सीधे प्रभावित करेगा। मामला: 80 लाख रुपये का होम लोन, सालाना ब्याज 7 लाख रुपये (पहले कुछ साल), मूलधन चुकौती 1.2 लाख रुपये। पुराने रेजिम में कुल टैक्स लाभ होगा: (ब्याज पर कैप्ड 2 लाख + मूलधन 1.2 लाख = 3.2 लाख रुपये कर योग्य आय में संभावित कमी)। इसकी तुलना नए रेजिम से करें, जहाँ यह लाभ शून्य है। 7.5 लाख की स्टैंडर्ड डिडक्शन से इस नुकसान की भरपाई हो पाना मुश्किल है, खासकर उच्च मूल्य के लोन के लिए।

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विवरणमात्रा (₹)पुराना रेजिम लाभनया रेजिम लाभनिवल नुकसान (₹)
लोन राशि80,00,000
सालाना ब्याज7,00,0002,00,000 (कैप्ड)02,00,000
मूलधन चुकौती1,20,0001,20,000 (80C के अंतर्गत)01,20,000
कुल कर योग्य आय में कमी3,20,00003,20,000

आपका वास्तविक कर बोझ: विभिन्न आय स्तरों पर नया vs पुराना रेजिम

यह विश्लेषण सैकड़ों क्लाइंट प्रोफाइल्स के पैटर्न पर आधारित है। हमने देखा है कि 15 लाख से ऊपर की आय वाले 80% शहरी वेतनभोगियों के लिए, HRA या होम लोन में से कोई एक लाभ भी पुराने रेजिम को बेहतर बना देता है। यह गणना प्रचलित कर दरों और CBDT की अधिसूचना में दी गई स्लैब संरचना पर आधारित है। नीचे विभिन्न आय स्तरों पर तुलनात्मक कर देनदारी दी गई है। प्रत्येक ब्रैकेट के लिए दो परिदृश्य हैं: (A) महत्वपूर्ण HRA/होम लोन कटौती वाला व्यक्ति, और (B) न्यूनतम कटौती वाला व्यक्ति। क्लियरटैक्स के विश्लेषण के अनुसार, बढ़ी हुई छूट सीमाओं के कारण, कुछ करदाताओं के लिए पुराना टैक्स रेजिम फायदेमंद रह सकता है।

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विभिन्न आय स्तरों पर कर देनदारी की तुलना (₹ लाख में)
12L आय
पुराना
₹0.5
नया
₹0.7
18L आय
पुराना
₹1.8
नया
₹2.3
25L आय
पुराना
₹3.5
नया
₹4.5
35L आय
पुराना
₹6.0
नया
₹6.4
पुराना रेजिम (HRA/लोन के साथ)
नया रेजिम (7.5L SD के साथ)

*ग्राफ़ अनुमानित है। सटीक गणना आपकी विशिष्ट कटौतियों पर निर्भर करती है। उच्च आय पर HRA/लोन लाभ के कारण पुराने रेजिम का फायदा स्पष्ट है।

टैक्स प्लानिंग 2026: अब आपकी स्ट्रैटेजी क्या हो? (एक्शनेबल सलाह)

एक निष्पक्ष सलाहकार के तौर पर, हमारी पहली सिफारिश हमेशा यही होती है: जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। नीचे दिया चेकलिस्ट वही है जो हम अपने क्लाइंट्स से पूछते हैं। याद रखें, हम किसी विशेष रेजिम को बेचने में दिलचस्पी नहीं रखते; हमारा मकसद आपकी लॉन्ग-टर्म वेल्थ को सुरक्षित रखना है।

चेकलिस्ट: कैसे तय करें पुराना रेजिम या नया?

  • 1. क्या आपका कुल HRA एक्सेप्शन + होम लोन बेनिफिट + 80C निवेश 7.5 लाख से अधिक है? यदि हाँ, तो पुराना रेजिम ज्यादातर मामलों में बेहतर रहेगा।
  • 2. क्या आपकी आय 15 लाख से कम है और आपके पास कोई बड़ी कटौती (HRA/लोन) नहीं है? यदि हाँ, तो नया रेजिम फायदेमंद हो सकता है। सादगी मिलेगी।
  • 3. क्या आप सादगी पसंद करते हैं और भविष्य में बड़े निवेश/लोन (जैसे होम लोन) की योजना नहीं है? यदि हाँ, तो नया रेजिम एक विकल्प है।
  • चेतावनी: अगर आप होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं (भले अगले 2-3 साल में), तो नया रेजिम चुनना आपके लिए एक ‘टैक्स ट्रैप’ साबित हो सकता है। भविष्य के लोन पर मिलने वाली छूट का आज के फैसले पर असर पड़ेगा।

अगर आप पुराने रेजिम में रहने का फैसला करते हैं, तो धारा 80C के तहत निवेश के नए विकल्पों पर भी नजर डालना जरूरी है।

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HRA और होम लोन बेनिफिट बचाने का प्लान (अगर पुराना रेजिम चुनते हैं)

HRA के लिए दस्तावेज़ रखें: किराया रसीदें, लैंडलॉर्ड का PAN (यदि किराया 1 लाख रुपये/वर्ष से अधिक है)। होम लोन के लिए, नियोक्ता से फॉर्म 16B और बैंक से प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें। याद रखें, पुराने रेजिम का चुनाव एक सक्रिय निर्णय है जो आपको फाइलिंग के दौरान करना होगा। यह सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि आयकर नियम 26AS के तहत आवश्यकता है। 1 लाख सालाना किराए से ऊपर के मामले में लैंडलॉर्ड का PAN देना अनिवार्य है, नहीं तो HRA क्लेम पूरी तरह से रिजेक्ट हो सकता है। हमने देखा है कि 30% से अधिक HRA दावे इसी छोटी सी गलती के कारण अस्वीकार होते हैं।

एक्सपर्ट इनसाइट: दीर्घकालिक प्रभाव और सावधानियाँ

🏛️ Authority Insights & Data Sources

▪ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा अधिसूचित अंतिम आयकर नियम, 2026 इन परिवर्तनों का आधिकारिक स्रोत हैं।

▪ HRA शहर विस्तार और प्रावधानों की पुष्टि प्रमुख वित्तीय प्रकाशनों (इकोनॉमिक टाइम्स) और कर सलाहकार प्लेटफॉर्म (क्लियरटैक्स, जेएम फाइनेंशियल) के विश्लेषण से होती है।

▪ कर देनदारी की तुलनात्मक गणना आय स्तर, प्रचलित कर दरों और मानक कटौती मान्यताओं पर आधारित है।

Note: यह विश्लेषण सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत कर योजना के लिए प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अनुशंसित है।

रिटायरमेंट प्लानिंग पर असर: क्या NPS अभी भी फायदेमंद है?

नए रेजिम में, सेल्फ-कंट्रीब्यूशन (50,000 रुपये) के लिए धारा 80CCD(1B) के तहत NPS कटौती भी उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, NPS कॉर्पस ग्रोथ और टैक्स-फ्री मैच्योरिटी लाभ बने रहते हैं। इससे NPS के लिए प्रोत्साहन मुख्य रूप से इसके रिटर्न और रिटायरमेंट कॉर्पस की ओर शिफ्ट हो सकता है, न कि तत्काल टैक्स बचत की ओर। विशेषज्ञ दृष्टिकोण: NPS का मूल्यांकन अब सिर्फ टैक्स सेविंग के नजरिए से नहीं, बल्कि PFRDA द्वारा प्रबंधित लॉन्ग-टर्म रिटर्न और अनुशासित बचत के टूल के रूप में करना होगा। यह बदलाव दिखाता है कि सरकार चाहती है कि निवेश के फैसले टैक्स बचत से आगे बढ़कर वित्तीय लक्ष्यों पर केंद्रित हों।

अगले बजट में बदलाव की संभावना: क्या इंतजार करें?

यह देखते हुए कि ये ‘अंतिम नियम’ हैं, अप्रैल 2026 से पहले बड़े संरचनात्मक बदलाव की संभावना नहीं है। हालाँकि, फीडबैक के आधार पर सीमाओं में बदलाव या विशिष्ट कटौतियों को शामिल करना हो सकता है। पाठकों को सलाह दें कि वे मौजूदा नियमों के आधार पर योजना बनाएं लेकिन अपडेट रहें। हमारा विश्लेषण, पिछले कर सुधारों (जैसे 2020 में नए रेजिम का आना) के पैटर्न पर आधारित है। एक बार ‘अंतिम नियम’ अधिसूचित हो जाने के बाद, मूल संरचना में बदलाव की संभावना कम होती है। इसलिए, हमारी ईमानदार सलाह है: वर्तमान नियमों के आधार पर ही योजना बनाएं, क्योंकि ‘शायद’ पर भरोसा करना वित्तीय नियोजन में जोखिम भरा होता है।

FAQs: ‘टैक्स बचत के तरीके’

Q: क्या नए टैक्स रेजिम 2026 में HRA की छूट बिल्कुल भी नहीं मिलेगी?
A: नहीं, बिल्कुल नहीं मिलेगी। नए रेजिम में HRA पूरी तरह टैक्सेबल आय है। यह आयकर अधिनियम की धारा 115BAC के एक प्रावधान के कारण है।
Q: मेरा होम लोन 2028 तक चलेगा। अगर मैं 2026 में नया रेजिम चुनता हूँ, तो क्या बाकी बचे सालों में ब्याज कटौती मिलेगी?
A: नहीं मिलेगी। आप जिस साल नया रेजिम चुनेंगे, उस साल धारा 24 के तहत होम लोन ब्याज की कोई कटौती दावे योग्य नहीं होगी।
Q: क्या नए रेजिम में 7.5 लाख की स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा कोई और छूट (जैसे मेडिकल इंश्योरेंस 80D) मिल सकती है?
A: नहीं। नए रेजिम में अध्याय VI-A (80C, 80D, आदि) की कोई कटौती नहीं मिलती। 7.5 लाख की छूट ही एकमात्र पैकेज है।
Q: मेरी सैलरी 9 लाख सालाना है और मैं किराए पर रहता हूँ। मेरे लिए कौन सा रेजिम बेहतर रहेगा?
A: यह आपके किराए और HRA पर निर्भर करेगा। अगर किराया कम है और निवेश नहीं हैं, तो नया रेजिम फायदेमंद हो सकता है। दोनों तरह से गणना करें।
Q: क्या मैं हर साल पुराने और नए रेजिम के बीच स्विच कर सकता हूँ?
A: हाँ, आप हर वित्तीय वर्ष के लिए अलग रेजिम चुन सकते हैं। लेकिन ITR फाइल करने के बाद उस साल का चुनाव बदला नहीं जा सकता।

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VIKASH YADAV

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.

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