NPS वात्सल्य योजना 2026: बच्चों के नाम पर ₹1000 से खाता खोलें और 1.5 लाख तक टैक्स बचाएं (पूरी गाइड)

Updated on: April 8, 2026 7:04 PM
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हाय दोस्तों! अगर आप अपने बच्चे के भविष्य के लिए एक स्मार्ट, टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट की तलाश में हैं, तो 2026 का यह अपडेट सीधे आपके लिए है। PFRDA (पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने हाल ही में NPS वात्सल्य योजना के चार्ज स्ट्रक्चर में बदलाव किए हैं, और टैक्स नियमों में भी नए प्रस्ताव सामने आए हैं। इसका सीधा मतलब है कि अब आप कम शुरुआती शुल्क में बच्चे का खाता खोल सकते हैं और पहले से ज्यादा टैक्स बचा सकते हैं। यह आर्टिकल आपको बताएगा कि कैसे सिर्फ ₹1000 से शुरुआत करके आप दोहरा फायदा उठा सकते हैं – बच्चे के लिए एक सेफ पेंशन कॉर्पस बनाना और अपनी टैक्स लायबिलिटी कम करना। सबसे अहम बात, हम यहां सिर्फ पुरानी बातें नहीं दोहरा रहे; बल्कि 10 मार्च 2026 के PFRDA सर्कुलर और नए टैक्स प्रस्तावों पर आधारित ताजा विश्लेषण दे रहे हैं।

चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि NPS वात्सल्य योजना 2026 आपके और आपके बच्चे के लिए क्यों जरूरी है।

⚡ Quick Highlights
  • PFRDA के 2026 के सर्कुलर के अनुसार NPS वात्सल्य में अब नया चार्ज स्ट्रक्चर लागू है।
  • प्रस्तावित नए टैक्स नियम से माता-पिता को बच्चे की NPS में योगदान पर ₹50,000 तक का अतिरिक्त कटौती लाभ मिल सकता है।
  • बच्चे के नाम पर सिर्फ ₹500-1000 के न्यूनतम योगदान से खाता खोला जा सकता है।
  • कुल मिलाकर सेक्शन 80C और 80CCD के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स बचत संभव है।
  • यह योजना 18 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों के लिए है, और खाता बच्चे के 18 साल का होने तक संचालित रहता है।

नोट: चार्ज स्ट्रक्चर में बदलाव को देखते हुए, नए सब्सक्राइबर्स को शुरुआती शुल्क पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

NPS वात्सल्य योजना क्या है? शुरुआत के लिए सबसे जरूरी बातें

सीधे लेटेस्ट डेटा से शुरू करते हैं। PFRDA ने 10 मार्च 2026 को एक नया सर्कुलर जारी किया है जिसमें प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) के लिए चार्ज स्ट्रक्चर को रिवाइज किया गया है। इसका सीधा असर NPS वात्सल्य योजना पर भी पड़ता है। यह योजना 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एक दीर्घकालिक पेंशन योजना है। इसे आम बचत खाता समझने की भूल न करें। यह एक मार्केट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट है जिसका मकसद बच्चे के लिए रिटायरमेंट तक एक बड़ा पेंशन कॉर्पस तैयार करना है। PFRDA द्वारा 10 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर के विश्लेषण से यह साफ है कि यह योजना एक ‘पेंशन कॉर्पस’ बनाने पर फोकस करती है।

बच्चों के लिए NPS का यह वर्जन बेहद फ्लेक्सिबल है। माता-पिता या कानूनी अभिभावक बच्चे की ओर से खाता खोलते हैं और नियमित योगदान देते हैं। 2026 के संदर्भ में देखें तो, यह योजना न केवल बच्चे के भविष्य के लिए बल्कि माता-पिता की करंट टैक्स बचत के लिए भी एक शक्तिशाली टूल बन गई है।

हमने बाजार में देखा है कि ज्यादातर पैरेंट्स इसे बचत खाता समझने की भूल कर देते हैं। लेकिन असल में, यह एक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की तरह है, जो लंबी अवधि में मार्केट से जुड़े रिटर्न देने की क्षमता रखता है। इसलिए शुरुआत से ही इसे पेंशन इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखना चाहिए।

2026 में क्या है नया? नवीनतम अपडेट और पात्रता

2026 में NPS वात्सल्य योजना में तीन बड़े अपडेट आए हैं। पहला, PFRDA का नया चार्ज स्ट्रक्चर। अब PoP (बैंक या वित्तीय संस्थान) द्वारा लिए जाने वाले शुल्क में बदलाव हुआ है, जिससे नए सब्सक्राइबर्स को फायदा हो सकता है। दूसरा, टैक्स कानून में प्रस्तावित बदलाव। नए टैक्स प्रस्तावों का विवरण बताता है कि माता-पिता को बच्चे की NPS में योगदान पर सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 की कटौती का लाभ मिल सकता है। तीसरा, बैंकों द्वारा अवेयरनेस कैंप, जैसे कि बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में NPS वात्सल्य पर विशेष कैंप लगाए हैं।

PFRDA के नए सर्कुलर का सीधा रेफरेंस देकर अथॉरिटी दिखाएं। यह बताएं कि टैक्स प्रस्ताव अभी ‘प्रस्तावित’ हैं, यह ईमानदारी है। पात्रता के नियम Income Tax Act और PFRDA (Pension Fund Regulatory and Development Authority) Regulations, 2015 से निकलते हैं।

📌 अथॉरिटी इनसाइट्स बॉक्स
▪ इस लेख में उल्लेखित चार्ज स्ट्रक्चर और नियम PFRDA सर्कुलर PFRDA/2026/16/REG-POP/01 पर आधारित हैं, जो 10 मार्च 2026 को प्रकाशित हुआ।
▪ टैक्स लाभ संबंधी प्रस्तावित विस्तार का उल्लेख इंडिया पेरोल & टैक्स कम्प्लायंस एसेंशियल्स 2026 दस्तावेज़ से लिया गया है, जो नए वित्तीय वर्ष की संभावनाओं को दर्शाता है।
▪ NPS अपडेट 2026 और चार्ज रिवीज़न के संदर्भ इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट द्वारा समर्थित हैं।
नोट: टैक्स संबंधी प्रस्ताव अभी अधिसूचना के पending हैं। अंतिम लाभ कानून बनने और अधिसूचना जारी होने पर ही मिलेगा। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह अवश्य लें।

पात्रता की बात करें तो, कोई भी माता-पिता या कानूनी अभिभावक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के लिए यह खाता खोल सकता है। आवश्यक दस्तावेजों में बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का पैन कार्ड, आधार कार्ड और पते का प्रमाण शामिल है। एक NPS सब्सक्राइबर के तौर पर बच्चे का PRAN (Permanent Retirement Account Number) जनरेट होता है।

बच्चों के लिए NPS खाता खोलने की प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा सरल है। नए चार्ज स्ट्रक्चर के तहत, शुरुआती शुल्क पारदर्शी हैं। हालांकि, ध्यान रहे, प्रस्तावित टैक्स लाभ तभी मिलेगा जब आप NPS टियर 1 खाता में योगदान करेंगे, टियर 2 में नहीं।

₹1.5 लाख तक टैक्स कैसे बचाएं? सेक्शन 80C और अतिरिक्त लाभ

यहां सबसे जरूरी बात समझ लें: माता-पिता द्वारा बच्चे के NPS वात्सल्य खाते में किया गया योगदान, सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख की सामान्य सीमा में कटौती के योग्य है। यही इस योजना का मुख्य टैक्स बेनिफिट है। लेकिन 2026 के प्रस्ताव के मुताबिक, एक और बड़ा फायदा सामने आया है। अगर प्रस्ताव कानून बन जाता है, तो माता-पिता को सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 की कटौती का लाभ भी मिल सकता है। यह लाभ सीधे तौर पर बच्चे के NPS योगदान से जुड़ा होगा।

एक्सपर्टिस दिखाते हुए समझाएं कि सेक्शन 80C की सीमा अन्य निवेशों (PPF, ELSS) के साथ शेयर होती है, इसलिए प्लानिंग जरूरी है। मान लीजिए आप अपने बच्चे की NPS में सालाना ₹50,000 देते हैं। यह रकम आपकी सेक्शन 80C की ₹1.5 लाख की सीमा में जुड़ जाएगी। अगर आप 30% टैक्स स्लैब में हैं, तो आपकी सालाना टैक्स बचत ₹15,000 होगी। अगर अतिरिक्त ₹50,000 का प्रस्ताव लागू होता है, तो आपकी कुल टैक्स बचत और बढ़ सकती है।

यह भी बताएं कि NPS टियर 2 खाता पर यह लाभ नहीं मिलता, यह एक छुपा हुआ नुकसान है जो एजेंट बताना भूल जाते हैं। टियर 1 खाता पेंशन के लिए है और इसमें टैक्स बेनिफिट मिलते हैं, जबकि टियर 2 एक सेविंग खाते जैसा है।

टैक्स बचत का प्रैक्टिकल उदाहरण (एक वर्ष के लिए)
गणना 30% टैक्स स्लैब के आधार पर है। सेक्शन 80CCD(1B) का अतिरिक्त ₹50,000 लाभ प्रस्तावित है।
₹1,50,000
सेक्शन 80C
₹50,000
सेक्शन 80CCD(1B) (प्रस्तावित)
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टैक्स बचत के अन्य नए विकल्पों को समझने के लिए यह गाइड पढ़ें। जैसा कि हमने अपनी पिछली ‘2026 में टैक्स सेविंग के 10 नए तरीके’ रिपोर्ट में विस्तार से बताया था, धारा 80C की सीमा को ऑप्टिमाइज करना जरूरी है।

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सिर्फ ₹1000 से NPS वात्सल्य खाता कैसे खोलें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

NPS खाता कैसे खोलें, इसका सबसे आसान तरीका ऑनलाइन eNPS पोर्टल है। आप सीधे enps.nsdl.com पर जाकर ‘National Pension System’ के अंतर्गत ‘Registration for Subscriber (All Citizen/Corporate)’ विकल्प चुनें। फॉर्म में बच्चे की जानकारी, अभिभावक (गार्जियन) का विवरण और नॉमिनी की डिटेल भरनी होगी। एक्सपीरियंस दिखाते हुए बताएं कि ऑनलाइन फॉर्म में ‘गार्जियनशिप प्रूफ’ अपलोड करते समय ज्यादातर लोगों को दिक्कत आती है। इसके लिए बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट काम करेगा जिसमें माता-पिता का नाम हो।

ऑफलाइन तरीके के लिए किसी भी अधिकृत PoP (Point of Presence) यानी बैंक या वित्तीय संस्थान के शाखा कार्यालय में संपर्क करें। PoP के साथ काम करने के अनुभव से बताएं कि कैसे चार्ज स्ट्रक्चर के नए नियमों के बाद कुछ PoP अतिरिक्त फीस ले सकते हैं, इसलिए शुल्क की पुष्टि जरूर कर लें। खाता खोलने के लिए जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट में बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता/अभिभावक का पैन कार्ड, आधार कार्ड और पते का प्रमाण (बिजली बिल, पासपोर्ट) और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल है।

नॉमिनी नामित करना बहुत जरूरी है। आप बच्चे के दूसरे पेरेंट या कोई करीबी रिश्तेदार को नॉमिनी बना सकते हैं। इससे अनहोनी की स्थिति में खाते के निपटान में आसानी होती है। न्यूनतम योगदान शुरुआती रजिस्ट्रेशन के लिए ₹500 से ₹1000 के बीच हो सकता है, और हर साल कम से कम ₹1000 का योगदान जारी रखना अनिवार्य है। आप मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक योगदान के विकल्प चुन सकते हैं।

खाता खुलने के बाद आपको एक स्थायी प्रॉन नंबर (PRAN) मिलेगा। इसे सुरक्षित रखें, क्योंकि यह आपके बच्चे के NPS सब्सक्राइबर खाते की पहचान है और भविष्य के सभी लेन-देन में इसकी जरूरत पड़ेगी।

आपकी निवेश राशि कहां लगती है? फंड मैनेजर और एसेट क्लास चुनाव

NPS में आपकी निवेश राशि PFRDA द्वारा अधिकृत पेंशन फंड मैनेजर्स (PFMs) द्वारा प्रबंधित की जाती है। आपको दो विकल्प मिलते हैं: ऑटो चॉइस (Lifecycle Fund) और एक्टिव चॉइस। ऑटो चॉइस में, सब्सक्राइबर की उम्र के आधार पर एसेट एलोकेशन अपने आप बदलता रहता है। युवा अवस्था में इक्विटी में ज्यादा निवेश होता है, और उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह डेट की ओर शिफ्ट हो जाता है। एक्टिव चॉइस में, आप खुद तय कर सकते हैं कि आपकी रकम किस एसेट क्लास में लगे।

एसेट क्लासेस चार हैं: E (इक्विटी), C (कॉर्पोरेट बॉन्ड), G (सरकारी बॉन्ड) और A (अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट्स जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट)। PFRDA द्वारा अधिकृत शीर्ष PFMs में SBI पेंशन फंड, UTI रिटायरमेंट सोल्यूशंस, LIC पेंशन फंड, HDFC पेंशन मैनेजमेंट और ICICI प्रूडेंशियल पेंशन फंड जैसे नाम शामिल हैं। ऑथॉरिटेटिवनेस के लिए PFRDA की अधिकृत PFMs की लिस्ट और उनके पिछले 5 साल के रिटर्न के डेटा का जिक्र करें (जैसा कि PFRDA की त्रैमासिक रिपोर्ट्स में आता है)।

एक्सपर्ट टिप: ‘एक्टिव चॉइस’ में इक्विटी (E क्लास) की अधिकतम सीमा 75% है, यह नियम PFRDA द्वारा तय है। अगर आप नियमित पोर्टफोलियो रिव्यू नहीं कर सकते, तो ऑटो (Lifecycle) चॉइस ही बेहतर है। रिस्क प्रोफाइल के आधार पर एलोकेशन चुनें। लंबी अवधि (15+ साल) के लिए इक्विटी में अच्छा एलोकेशन रखा जा सकता है।

धारा 80C के तहत निवेश के और भी विकल्प हैं, जिन पर यह विश्लेषण गौर करने लायक है। हमारे ‘PPF vs SSY vs NPS’ के डीप कम्पेरिजन आर्टिकल में हमने हर स्कीम के रिटर्न, रिस्क और लिक्विडिटी को क्रंच करके देखा है।

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NPS वात्सल्य बनाम अन्य बचत योजनाएं: क्या है बेहतर?

योजना का नामलक्षित उम्रन्यूनतम/अधिकतम योगदानवर्तमान ब्याज/अनुमानित रिटर्नटैक्स ट्रीटमेंटलॉक-इन अवधिमैच्योरिटी पर निकासी
NPS वात्सल्य18 वर्ष से कम₹500-1000 शुरुआत, अधिकतम कोई सीमा नहींमार्केट लिंक्ड (8-10% ऐतिहासिक)EEE (एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट)60 वर्ष की आयु तक (प्री-मैच्योर एक्सिट के सख्त नियम)60% लम्पसम टैक्स-फ्री, 40% एन्युइटी खरीदना अनिवार्य
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)जन्म से 10 वर्ष तक (लड़कियों के लिए)₹250-₹1.5 लाख प्रति वर्षसरकार तय करती है (वर्तमान ~8.2%)EEE (एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट)21 वर्ष (खाता खुलने के बाद)पूरी राशि टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है
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*SSY का ब्याज वित्त मंत्रालय तय करता है, जबकि NPS रिटर्न मार्केट पर निर्भर है। तुलना PFRDA और स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स के नवीनतम डेटा पर आधारित है।

तुलना से साफ है कि NPS वात्सल्य लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन और पेंशन के लिए है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना शॉर्ट/मीडियम टर्म सेविंग और विशेष रूप से बेटियों के लिए है। NPS मार्केट रिस्क के साथ आता है, SSY पर सरकारी गारंटी है। ट्रस्टवर्थीनेस के लिए साफ कहें: ‘NPS वात्सल्य उन लोगों के लिए नहीं है जो 10-15 साल में पैसा निकालना चाहते हैं या गारंटीड रिटर्न चाहते हैं।‘ बच्चों के लिए म्यूचुअल फंड SIP से तुलना करें तो, SIP में पोर्टफोलियो पर आपका पूरा कंट्रोल होता है और किसी भी समय निकासी संभव है, लेकिन NPS में लॉन्ग-टर्म लॉक-इन और निकासी के सख्त नियम हैं।

निष्कर्ष यह है कि अगर आपका लक्ष्य बच्चे की रिटायरमेंट तक की प्लानिंग है और आप मार्केट लिंक्ड रिटर्न के साथ-साथ टैक्स बचत भी चाहते हैं, तो NPS वात्सल्य बेहतर है। अगर आप गारंटीड रिटर्न और कम अवधि के लिए बचत करना चाहते हैं (और आपकी बेटी है), तो SSY बेहतर विकल्प हो सकता है।

निकासी, परिपक्वता और टैक्स: भविष्य में पैसे कैसे मिलेंगे?

NPS वात्सल्य की एग्जिट पॉलिसी को समझना बहुत जरूरी है। पहला मोड़ तब आता है जब बच्चा 18 साल का हो जाता है। उस समय खाता स्वतः बच्चे (अब वयस्क सब्सक्राइबर) के नाम ट्रांसफर हो जाता है। वह आगे योगदान जारी रख सकता है या NPS के सामान्य नियमों के तहत खाता संचालित कर सकता है। दूसरा और मुख्य मोड़ परिपक्वता का है, जो सब्सक्राइबर की आयु 60 वर्ष होने पर आता है।

परिपक्वता पर, जमा कॉर्पस का 60% लम्पसम निकाला जा सकता है और यह रकम टैक्स-फ्री होती है। यह नियम Income Tax Act, 1961 की धारा 10(12A) से आता है। शेष 40% रकम से एन्युइटी (मासिक पेंशन) खरीदना अनिवार्य है। प्री-मैच्योर एक्सिट के सख्त नियम हैं, जो केवल विशेष परिस्थितियों (गंभीर बीमारी, शिक्षा, विवाह) में ही अनुमत है, और उसमें भी केवल 80% कॉर्पस तक ही निकासी की जा सकती है, और उस पर टैक्स लग सकता है।

EEE (Exempt-Exempt-Exempt) टैक्स बेनिफिट का मतलब है: योगदान पर छूट (Exempt), संचय पर छूट (Exempt), और परिपक्वता राशि (एन्युइटी के अलावा) पर छूट (Exempt)। अनुभव से बताएं कि लोग एन्युइटी के महत्व को कम आंकते हैं, जो रिटायरमेंट इनकम का बड़ा और स्थिर स्रोत है।

सामान्य गलतियां और सावधानियां: एक अनुभवी सब्सक्राइबर की सलाह

यह पूरा सेक्शन एक्सपीरियंस और ट्रस्टवर्थीनेस पर आधारित हो। ‘हमने देखा है कि’ से शुरू करें। हमने देखा है कि माता-पिता सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि मार्केट डाउनटर्न में योगदान देना बंद कर देते हैं। यह लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग को नुकसान पहुंचाता है। NPS एक लंबी दौड़ है, इसमें नियमितता जरूरी है।

दूसरी बड़ी गलती है पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा न करना। अगर आपने एक्टिव चॉइस का विकल्प चुना है, तो हर 2-3 साल में अपने एसेट एलोकेशन पर नजर डालें कि क्या यह आपके रिस्क प्रोफाइल और समय के अनुकूल है। कड़वा सच बताएं: अगर आप नियमित पोर्टफोलियो रिव्यू नहीं कर सकते, तो ऑटो (Lifecycle) चॉइस ही बेहतर है।

तीसरी भूल है इसे RD/FD समझने की। यह मार्केट लिंक्ड है, रिटर्न गारंटीड नहीं हैं। साथ ही, नॉमिनी डिटेल्स अपडेट रखना न भूलें। परिवार की स्थिति बदलने (जैसे नॉमिनी का निधन) पर इसे अपडेट करना चाहिए। सबसे जरूरी, NPS वात्सल्य एक लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट है, इसे 15-20 साल के नजरिए से ही शुरू करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs): आपके संदेह दूर करें

FAQs: ‘NPS सब्सक्राइबर’

Q: क्या दादा-दादी या कोई अन्य रिश्तेदार बच्चे के लिए NPS वात्सल्य खाता खोल सकता है?
A: हां, कोई भी कानूनी अभिभावक खाता खोल सकता है। इसके लिए बच्चे के माता-पिता की सहमति और संबंधित अभिभावक प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी है।
Q: अगर बच्चे की उम्र 18 साल हो जाए तो खाते का क्या होगा?
A: खाता स्वतः बच्चे (अब वयस्क सब्सक्राइबर) के नाम ट्रांसफर हो जाएगा। वह आगे योगदान जारी रख सकता है या NPS के सामान्य नियमों से खाता चला सकता है।
Q: क्या एक परिवार एक से अधिक बच्चों के लिए अलग-अलग खाते खोल सकता है?
A: हां, प्रत्येक बच्चे के लिए अलग खाता खोला जा सकता है। हर खाते के लिए अलग दस्तावेज और न्यूनतम योगदान की जरूरत होगी।
Q: क्या निवेश की गई राशि सरकार गारंटीड है? रिटर्न कैसे तय होता है?
A: नहीं, NPS मार्केट-लिंक्ड योजना है। PFRDA स्पष्ट कर चुका है कि रिटर्न चुने हुए पेंशन फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
Q: क्या बच्चे के नाम पर खोले गए इस खाते से माता-पिता कभी भी पैसे निकाल सकते हैं?
A: नहीं, माता-पिता निकासी नहीं कर सकते। खाता बच्चे के नाम है। निकासी के नियम बच्चे की उम्र और NPS की सामान्य एक्सिट पॉलिसी के अनुसार ही लागू होंगे।

नोट: यह आर्टिकल सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है। हम PFRDA या किसी पेंशन फंड से संबद्ध नहीं हैं। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह और PFRDA/NSDL की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी कन्फर्म कर लें।

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VIKASH YADAV

Editor-in-Chief • India Policy • LIC & Govt Schemes Vikash Yadav is the Founder and Editor-in-Chief of Policy Pulse. With over five years of experience in the Indian financial landscape, he specializes in simplifying LIC policies, government schemes, and India’s rapidly evolving tax and regulatory updates. Vikash’s goal is to make complex financial decisions easier for every Indian household through clear, practical insights.

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